नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव टीम।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को 78वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से अपने संबोधन में जहां विकसित भारत के संकल्प, बीजेपी सरकार के काम और अन्य चीजों पर बात की तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा पर बात करते हुए महिलाओं और बेटियों पर हो रहे अत्याचार पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि हमें गंभीरता से सोचना चाहिए। महिलाओं, बेटियों के प्रति अत्याचार हो रहे हैं। उसके प्रति आक्रोश है समाज में। इसे लेकर हमारी राज्य सरकारों को गंभीरता से लेना होगा। राक्षसी कृत्य करने वालों को जल्द से जल्द सजा हो, जो समाज में विश्वास पैदा करने के लिए जरूरी है। अपराधियों में डर जरूरी है. सजा पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
2036 का ओलंपिक भारत में कराने की तैयारी
पीएम मोदी ने कहा कि हम वर्ष 2036 में भारत में ओलंपिक खेलों के आयोजन की तैयारी कर रहे है। पीएम मोदी ने लालकिले के प्राचीर से ऐलान किया कि वर्ष 2036 में भारत में ओलंपिक हो इसका पूरा प्रयास किया जा रहा और इसके लिये तैयारी भी शुरु कर दी गई है। उन्होंने कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के फ्यूचर होस्ट कमीशन (एफएचसी) के साथ बातचीत शुरू करके 2036 में ओलंपिक की मेजबानी की दिशा में पहला कदम पहले ही उठा लिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में होने वाले पैरालंपिक खेलों के लिए भारतीय दल के सदस्यों को शुभकामनाएं दी। इसके साथ ही उन्होंने पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले एथलीटों का भी हौसला बढ़ाते हुए कहा कि आज हमारे साथ वो युवा भी हैं, जिन्होंने ओलंपिक में भारत का झंडा बुलंद किया। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों की ओर से सभी एथलीट और खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत टोक्यो पैरालिंपिक में 19 पदक और पैरा एशियाई खेलों में ऐतिहासिक 111 पदक जीतने की लय को जारी रखना चाहेगा। आगामी 28 अगस्त से शुरू होने वाले पेरिस पैरालिंपिक के लिए 84 एथलीटों का भारतीय दल तीरंदाजी, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, नौकायन, साइकिलिंग, ब्लाइंड जूडो, पावरलिफ्टिंग, रोइंग, निशानेबाजी, तैराकी, टेबल टेनिस, और तायक्वांडो सहित 12 प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेंगे।
देश में सेक्युलर सिविल कोड अब समय की मांग
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मौजूदा नागरिक संहिता को सांप्रदायिक और भेदभाव पर आधारित बताते हुए कहा कि अब समय की मांग है कि पूरे देश में धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता (सेक्युलर सिविल कोड) लागू हो। पीएम मोदन ने कहा कि नागरिक संहिता भेदभावपूर्ण तथा सांप्रदायिक है और अब इसकी जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी इस बारे में बार-बार चर्चा की है और आदेश भी दिये हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यूनीफोर्म सिविल कोड को लेकर बार-बार चर्चा की है और आदेश दिये हैं तथा देश का बड़ा वर्ग मानता है कि सिविल कोड एक तरह से सांप्रदायिक सिविल कोड है, भेदभाव करने वाला है और इसमें सच्चाई भी है।
परिवारवाद, जातिवाद से देश को मुक्त करना जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि चहुमुखी विकास के लिए परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति घातक है इसलिए देश को जल्द से जल्द जातिवाद और परिवारवाद की जंजीरों से मुक्ति दिलाने की जरूरत है। पीएम मोदी ने कहा कि वह देश को जातिवाद और परिवारवाद से मुक्त करना चाहते हैं, इसलिए देश में एक लाख ऐसे तेजस्वी युवाओं को आगे लाना चाहते हैं जो जन प्रतिनिधि बनें और समाज सेवा करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को समृद्ध करने के लिए ऐसे एक लाख युवाओं को राजनीति में लाना है जिनके परिवार का कभी कोई सदस्य राजनीति में नहीं रहा हो। इससे देश को परिवारवाद और जातिवाद को मुक्ति मिलेगी और देश के ओजस्वी युवाओं को राजनेता के रूप में राष्ट्र की सेवा का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश में बराबर चुनाव होते रहते हैं और इससे राष्ट्रीय विकास प्रभावित होता है इसलिए पूरे देश को अब एक राष्ट्र एक चुनाव के लिए तैयार रहने की जरूरत है। वन नेशन वन इलेक्शन के सपने को साकार करने के लिए सबको आगे आने की जरूरत है।
ऐसी व्यवस्था बने रहे हैं कि विदेश के बच्चे भारत पढ़ने आएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हम भारत में ऐसी शिक्षा व्यवस्था बना रहे हैं कि देश के बच्चों को पढ़ने के लिए विदेशों में जाने की आवश्यकात नहीं पड़े, बल्कि विदेशों से पढ़ने के लिए बच्चे यहां आएं। उन्होंने कहा कि जो हो गया है, हम उससे संतुष्ट होकर बैठने वाले नहीं है। हम विकास को, समृद्धि को अपना स्वभाव बनाना चाहते हैं। आज नयी शिक्षानीति के कारण शिक्षा क्षेत्र को 21वीं सदी के अनुरूप व्यवस्था बना रहे हैं, मैं नहीं चाहता कि मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चे विदेश पढ़ने जाएं और मोटा पैसा खर्च हो। मैं चाहता हूं कि भारत में ऐसी शिक्षा व्यवस्था हो, जिससे विदेश से बच्चे यहां पढ़ने आएं। उन्होंने बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा का महान इतिहास रहा है। हमने नालंदा यूनिवर्सिटी (नालंदा विश्वविद्यालय) को फिर से शुरू किया है। हमारा प्रयास नालंदा को उसका पुराना गौरव लौटना है।