नई दिल्ली, 24 मई 2025 - भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए स्वदेशी आकाशतीर (Akashteer) वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली को विकसित किया है, जो आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा विकसित यह प्रणाली भारतीय सेना के वायु रक्षा कोर (Corps of Army Air Defence) की रीढ़ बन चुकी है और हाल के ऑपरेशन सिंदूर में इसने अपनी प्रभावशीलता को साबित किया है।
आकाशतीर क्या है?
आकाशतीर, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'आकाश का तीर', एक अत्याधुनिक, पूरी तरह से स्वदेशी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वायु रक्षा नियंत्रण प्रणाली है। यह प्रणाली भारतीय सेना को युद्ध क्षेत्र में निचले स्तर के हवाई क्षेत्र की निगरानी करने और जमीनी वायु रक्षा हथियार प्रणालियों को कुशलतापूर्वक नियंत्रित करने में सक्षम बनाती है। यह प्रणाली ड्रोन, मिसाइलों, लड़ाकू विमानों और अन्य हवाई खतरों को वास्तविक समय में पहचानने, ट्रैक करने और नष्ट करने में सक्षम है।
आकाशतीर को भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित किया गया है, जो रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रणाली भारतीय वायुसेना के एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (IACCS) के साथ एकीकृत है, जो सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच समन्वय को बढ़ाता है।
ऑपरेशन सिंदूर में आकाशतीर की भूमिका
मई 2025 में, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, आकाशतीर ने पाकिस्तान द्वारा शुरू किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पाकिस्तान ने 8-10 मई की रात को श्रीनगर, जम्मू, अमृतसर, बठिंडा और चंडीगढ़ सहित 15 स्थानों पर समन्वित हमले किए। आकाशतीर ने इन हमलों को तुरंत पहचानकर और समन्वित प्रतिक्रिया देकर भारतीय हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखा। इस प्रणाली ने भारतीय सेना को वास्तविक समय में हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम बनाया, जिससे कोई भी दुश्मन ड्रोन या मिसाइल भारतीय क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सका।
आकाशतीर की प्रमुख विशेषताएं
आकाशतीर प्रणाली अपनी उन्नत तकनीक और स्वचालित प्रणालियों के लिए जानी जाती है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
परियोजना का विकास और तैनाती
मार्च 2023 में, रक्षा मंत्रालय ने बीईएल के साथ 1,982 करोड़ रुपये (लगभग 234 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की लागत से आकाशतीर परियोजना के लिए अनुबंध किया। इस परियोजना के तहत, 30 सितंबर 2024 तक बीईएल ने भारतीय सेना को 100 आकाशतीर इकाइयां सौंपीं, और नवंबर 2024 तक 107 इकाइयों की डिलीवरी हो चुकी थी। मार्च 2025 तक 105 और इकाइयों की डिलीवरी की योजना है, और अप्रैल 2027 तक कुल 455 इकाइयों की आपूर्ति पूरी हो जाएगी।
नवंबर 2024 में, भारतीय सेना ने आकाशतीर का युद्ध परिदृश्यों के अनुकरण के साथ सत्यापन परीक्षण किया, जिसमें इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि हुई। यह प्रणाली भारत की वायु रक्षा को और अधिक मजबूत करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो इसे इजरायल के आयरन डोम, चीनी एचक्यू-9 और अमेरिकी एकीकृत वायु और मिसाइल रक्षा प्रणालियों के समकक्ष बनाती है।
आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक
आकाशतीर भारत के आत्मनिर्भर भारत पहल का एक शानदार उदाहरण है। यह प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी है और इसमें किसी भी विदेशी घटक या उपग्रह पर निर्भरता नहीं है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारत अब अपने 65% रक्षा उपकरणों का घरेलू उत्पादन करता है, और 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। आकाशतीर जैसी प्रणालियां इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
आकाशतीर का डिज़ाइन भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। यह प्रणाली सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपग्रेड के लिए सक्षम है, जिससे यह उभरते खतरों के खिलाफ प्रभावी बनी रहेगी। इसके अलावा, यह प्रणाली भारतीय सेना को न केवल रक्षात्मक बल्कि सक्रिय रणनीतिक रक्षा प्रदान करती है, जो आधुनिक युद्ध की जटिलताओं से निपटने में सक्षम है।