नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2024-25 की अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च) में 7.4% की मजबूत वृद्धि दर्ज की, जो पिछले चार तिमाहियों में सबसे अधिक है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार यह वृद्धि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 7.2% और रॉयटर्स के 6.7% के पूर्वानुमान से भी अधिक रही। हालांकि पूरे वर्ष की बात करें तो GDP वृद्धि दर 6.5% रही, जो पिछले वर्ष 2023-24 की 9.2% वृद्धि की तुलना में कम है और पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर सालाना प्रदर्शन है।
वृद्धि में निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों की बड़ी भूमिका रही, जिसमें निर्माण क्षेत्र ने 10.8% की तेज़ विकास दर दर्ज की। ग्रामीण मांग में सुधार और सरकार के पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी ने भी इस आर्थिक विस्तार को सहारा दिया। हालांकि, निजी उपभोग की वृद्धि दर घटकर 6% रह गई, जो पिछली तिमाही में 8.1% थी, वहीं सरकारी अंतिम उपभोग व्यय में गिरावट देखी गई। सकल मूल्य वर्धित (GVA) दर इस तिमाही में 6.8% रही, जो पिछले तिमाही के 6.5% से थोड़ी अधिक है।
वित्त वर्ष 2024-25 के लिए नॉमिनल GDP 9.8% की वृद्धि के साथ 330.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो बजट अनुमान से थोड़ा अधिक है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं और निजी निवेश में सुस्ती के कारण अगले वित्त वर्ष 2025-26 में वृद्धि दर घटकर 6% रह सकती है। इसके बावजूद, ग्रामीण मांग की मजबूती और कम निर्यात निर्भरता के चलते भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, भारत ने जापान को पीछे छोड़ते हुए 4.18 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उपलब्धि प्राप्त कर ली है।