Tuesday 20-Jan-2026

बिहार वोटर लिस्ट संशोधन विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, विपक्ष ने लगाया वोटबंदी का आरोप

बिहार वोटर लिस्ट संशोधन विवाद: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई, विपक्ष ने लगाया वोटबंदी का आरोप

इम्पैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आज, 7 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन अब ये सुनवाई को 10 जुलाई के लिए स्थगित कर दिया गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स सहित कई याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के 24 जून के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मतदाता सूची के संशोधन का निर्देश दिया गया था। विपक्ष ने इसे वोटबंदी और संस्थागत मतदाता वंचन का हथियार करार दिया है।

 निर्वाचन आयोग ने बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू किया, जिसका उद्देश्य अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना और केवल पात्र नागरिकों को सूची में शामिल करना है। आयोग के अनुसार, यह कवायद नेपाल, बांग्लादेश, और म्यांमार जैसे देशों से अवैध प्रवासियों को हटाने के लिए जरूरी है। हालांकि, विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया लाखों गरीब और प्रवासी मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करने का प्रयास है।तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लंघन करती है। उन्होंने दावा किया कि यह आदेश विशेष रूप से उन लोगों को निशाना बनाता है जो आधार कार्ड जैसे दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकते, जिससे महिलाएं, गरीब, और प्रवासी मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। आरजेडी सांसद मनोज झा ने 11 बिंदुओं में अपनी याचिका में कहा कि यह प्रक्रिया संस्थागत वोटबंदी का हथियार है, जिसका मकसद विपक्षी मतदाताओं को दबाना है।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच, जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में हुई और इस मामले की सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिकाकर्ताओं की ओर से जल्द सुनवाई की मांग की, यह तर्क देते हुए कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से लाखों मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है। सिब्बल ने कहा, यह प्रक्रिया असंवैधानिक है और इससे गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है और गुरुवार को विस्तृत सुनवाई की उम्मीद है।निर्वाचन आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता फॉर्म भर सकते हैं और जरूरी दस्तावेज बाद में जमा कर सकते हैं। एक पूर्ण पेज विज्ञापन के जरिए आयोग ने मतदाताओं को नाम जोड़ने, सुधार करने, और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया समझाई। आयोग ने कहा, भारत का संविधान सर्वोपरि है, और केवल भारतीय नागरिक ही मतदान कर सकते हैं।हालांकि, सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन को लेकर भ्रम फैला, जिसमें दावा किया गया कि दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं है।आयोग ने इस भ्रम को दूर करते हुए प्रक्रिया को पारदर्शी बताया।

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