Thursday 19-Feb-2026

केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले,हर-हर महादेव की गूंज के साथ भक्तों पर पुष्पवर्षा

केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले,हर-हर महादेव की गूंज के साथ भक्तों पर पुष्पवर्षा

इम्पैक्ट लाइव टीम पटना :-विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट 2 मई 2025 को सुबह 7 बजे वृष लग्न में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भक्तों के लिए खोल दिए गए। इस पावन अवसर पर मंदिर को 108 क्विंटल फूलों से सजाया गया, और हेलिकॉप्टर से भक्तों पर पुष्पवर्षा की गई। सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों और ओम नमः शिवाय और जय बाबा केदार के उद्घोषों से केदारनगरी भक्ति के रंग में डूब गई। पहले दिन ही 12,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए।

केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलते ही मंदिर के अंदर जलती अखंड ज्योति के दर्शन भक्तों के लिए उपलब्ध हुए। पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न हुई, जो चारधाम यात्रा के प्रति उनकी आस्था को दर्शाता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी पत्नी गीता धामी भी इस अवसर पर मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने बाबा केदार की पूजा-अर्चना की और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा, यह चारधाम यात्रा का शुभारंभ है, और बाबा केदार के आशीर्वाद से यह यात्रा भक्तों के लिए सुखद और सुरक्षित होगी।

मंदिर के कपाट खुलने से पहले देर रात से ही करीब 2,500 श्रद्धालु केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए मौजूद थे। भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया, जिससे भक्तों को सुगमता से दर्शन का अवसर मिला।केदारनाथ धाम को इस अवसर पर भव्य रूप से सजाया गया था। मंदिर परिसर को 108 क्विंटल फूलों से सजाया गया, जिसने मंदिर की सुंदरता को और बढ़ा दिया। हेलिकॉप्टर से भक्तों पर पुष्पवर्षा की गई, जिसने भक्तों में उत्साह का संचार किया। यह नजारा भक्तों के लिए अविस्मरणीय रहा, और कई भक्तों ने इसे बाबा केदार के आशीर्वाद का प्रतीक बताया।

चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड सरकार ने व्यापक तैयारियां की हैं। केदारनाथ धाम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, और भक्तों की सुविधा के लिए टोकन सिस्टम के अलावा परिवहन और आवास की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि पहले महीने वीआईपी दर्शन पर रोक रहेगी, ताकि सामान्य भक्तों को दर्शन में प्राथमिकता मिले।केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है और इसे भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिक महत्व के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। हर साल शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, और गर्मियों में पुनः खोले जाते हैं। इस वर्ष मंदिर 2 मई से 6 महीने तक भक्तों के लिए खुला रहेगा।

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