मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष 14 जनवरी को पुनवर्स और पुष्य नक्षत्र के अद्भुत संयोग में मनाया जा रहा है, जो 19 वर्षों के बाद एक अत्यंत खास और दुर्लभ घटना है। इस दिन का विशेष महत्व है क्योंकि सूर्य 14 जनवरी को सुबह 09:03 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। मकर संक्रांति को लेकर दान-पुण्य और गंगा स्नान की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है, जिसे इस दिन विशेष रूप से फलदायक माना जाता है।
इस पर्व के दौरान गंगा नदी में श्रद्धालु बड़ी संख्या में स्नान करने आते हैं, ताकि उन्हें पुण्य की प्राप्ति हो सके। हालांकि, इस बार जिला प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र गंगा नदी में 14 और 15 जनवरी को नावों के परिचालन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन का मानना है कि इन दो दिनों में भारी भीड़ हो सकती है, जिससे किसी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय घटना से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके साथ ही, एसडीआरएफ की टीमों को गोताखोरों और मोटर बोट्स के साथ विभिन्न घाटों पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति का त्वरित समाधान किया जा सके।
पटना डेयरी प्रोजेक्ट ने इस विशेष अवसर के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है। त्योहार के दौरान 35 लाख लीटर दूध और 950 मैट्रिक टन दही की आपूर्ति की योजना बनाई गई है। यह कदम खासतौर पर खिचड़ी पर्व को लेकर लिया गया है, ताकि इस दिन खिचड़ी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री की कोई कमी न हो। इसके अतिरिक्त, 18 मीट्रिक टन तिलकुट का भी प्रबंध किया गया है, जो इस दिन की विशेष मिठाई के रूप में खाया जाता है।
बाजारों में मकर संक्रांति के लिए विशेष रूप से फूल गोभी, मटर और कटहल की भारी मांग देखी गई है। इन सब्जियों का उपयोग खिचड़ी और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाने में किया जाता है, जो इस दिन के खास भोजन का हिस्सा होते हैं। मकर संक्रांति के त्योहार का आनंद केवल घरों तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शहर में उत्सव का माहौल रहता है।
पटना के लाला लाजपत राय भवन में पंजाबी बिरादरी और लेडीज विंग द्वारा मिलकर लोहड़ी प्रज्ज्वलित की गई, जहां लोग एकत्रित होकर अग्नि की परिक्रमा करते हुए एक दूसरे को त्योहार की शुभकामनाएँ देने पहुंचे। इस दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान भी किए गए। लोहड़ी के इस आयोजन ने मकर संक्रांति की उमंग को और भी बढ़ा दिया।