Thursday 30-Apr-2026

87 की उम्र में मनोज कुमार का निधन: भारतीय सिनेमा ने खोया एक देशभक्त नायक

87 की उम्र में मनोज कुमार का निधन: भारतीय सिनेमा ने खोया एक देशभक्त नायक

इम्पैक्ट लाइव टीम :-

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज कुमार का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने शुक्रवार तड़के मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। मनोज कुमार, जिन्हें प्यार से 'भारत कुमार' के नाम से जाना जाता था, अपनी देशभक्ति से भरी फिल्मों के लिए मशहूर थे। उनके निधन से फिल्म उद्योग और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है।मनोज कुमार के बेटे कुणाल गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता लंबे समय से उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। कुणाल ने कहा,'उन्हें कई सालों से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ थीं। वह अगले महीने 88 साल के होने वाले थे, लेकिन 87 की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। यह ईश्वर की कृपा है कि वह शांति से इस दुनिया से गए।' चिकित्सा रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी मृत्यु का कारण कार्डियोजेनिक शॉक था, जो एक गंभीर हार्ट अटैक (तीव्र मायोकार्डियल इंफेक्शन) के परिणामस्वरूप हुआ। इसके अलावा, वह पिछले कुछ महीनों से डिकंपेंसेटेड लिवर सिरोसिस से भी पीड़ित थे, जिसने उनकी सेहत को और बिगाड़ दिया था।

मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को अविभाजित भारत के अबोटाबाद में हरिकृष्ण गिरी गोस्वामी के रूप में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया, जहाँ उन्होंने हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह फिल्मों में करियर बनाने के लिए मुंबई चले गए। अपनी पहली फिल्म 'फैशन' (1957) में उन्होंने एक 80 साल के बुजुर्ग का किरदार निभाया था, लेकिन उनकी असली पहचान देशभक्ति फिल्मों से बनी। 'शहीद'(1965), 'उपकार' (1967), 'पुरब और पश्चिम' (1970), और 'रोटी कपड़ा और मकान' (1974) जैसी फिल्मों ने उन्हें 'भारत कुमार' की उपाधि दिलाई।उनकी फिल्में न केवल मनोरंजन का साधन थीं, बल्कि सामाजिक संदेश और राष्ट्रीय गौरव को भी दर्शाती थीं। 'उपकार' फिल्म का गीत 'मेरे देश की धरती' आज भी देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी फिल्मों ने स्वतंत्रता के बाद के भारत में राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत किया।मनोज कुमार को उनके योगदान के लिए कई सम्मानों से नवाजा गया। 1992 में उन्हें पद्म श्री और 2015 में भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला।'शहीद' फिल्म के लिए मिले पहले राष्ट्रीय पुरस्कार की पूरी राशि उन्होंने भगत सिंह के परिवार को दान कर दी थी, जो उनकी उदारता और देशभक्ति को दर्शाता है।मनोज कुमार के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “श्री मनोज कुमार जी के निधन से गहरा दुख हुआ। वह भारतीय सिनेमा के प्रतीक थे, जिन्हें उनकी देशभक्ति के लिए विशेष रूप से याद किया जाता था, जो उनकी फिल्मों में भी झलकती थी।” पीएम ने उनके साथ की एक पुरानी तस्वीर भी साझा की।बॉलीवुड के सितारों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। अक्षय कुमार ने लिखा, “मैंने उनसे सीखा कि देश के लिए प्यार और गर्व से बड़ी कोई भावना नहीं है। वह हमारे बिरादरी की सबसे बड़ी संपत्ति थे।” फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री ने उन्हें “भारतीय सिनेमा का पहला मौलिक और प्रतिबद्ध देशभक्त फिल्मकार” बताया।