अभिनेता से राजनेता बने सांसद मनोज तिवारी ने कहा है कि बदलते दौर में आगे बढ़ने के लिए भोजपुरी सिनेमा को सत्यजीत रे और प्रकाश झा जैसे संवेदनशील फिल्म निर्माताओं की जरूरत है। पूर्व भोजपुरी स्टार एवं गायक तिवारी ने 'पीटीआई-भाषा' मुख्यालय में एजेंसी के संपादकों के साथ बातचीत में कहा कि भारी लोकप्रियता के बावजूद भोजपुरी सिनेमा अब भी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं पहुंच पाया है।
मनोज तिवारी ने कहा, हमें भोजपुरी सिनेमा को आगे ले जाने के लिए कदम उठाने की जरूरत है और इसके लिए हमें प्रकाश झा, सत्यजीत रे साहब जैसे निर्देशकों की भी जरूरत है। हमारे पास बहुत दर्शक हैं, लेकिन हम अब भी उस स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं। मनोज तिवारी ने 'ससुरा बड़ा पैसावाला', 'दारोगा बाबू आई लव यू' और 'बंधन टूटे ना' सहित 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है।
महान फिल्म निर्देशक रे ने 'पाथेर पांचाली', 'अपराजितो', 'अपुर संसार' और 'चारुलता' जैसी बेहतरीन फिल्मों के साथ बंगाली संस्कृति और लोकाचार को वैश्विक मानचित्र पर रखा, जबकि झा ने 'गंगाजल', 'अपहरण' और 'राजनीति' जैसी फिल्मों के माध्यम से बिहार के सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को उठाने की कोशिश की है।
मनोज तिवारी के अनुसार, जिस दिन भोजपुरी क्षेत्र के फिल्म निर्माता बड़े पर्दे के लिए 'मिर्जापुर' और 'महारानी' जैसी कहानियों को पेश करना शुरू कर देंगे, यह दक्षिण के सिनेमा के साथ प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में होगा, जो इस समय अपने चरमत्कोर्ष पर है। ''समय आएगा (भोजपुरी सिनेमा का)। 'मिर्जापुर' या 'महारानी' जैसी वेब सीरीज, ये कहानियां हमारे क्षेत्र की हैं, भोजपुरी सिनेमा की हैं। सिनेमा उस तरह की सामग्री नहीं उठा रहा है, लेकिन जिस दिन फिल्में ऐसी कहानियों का समर्थन करना शुरू कर देंगी, हम (भोजपुरी सिनेमा) दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के साथ प्रतिस्पर्धा करना शुरू कर देंगे।
उन्होंने कहा कि भोजपुरी फिल्म उद्योग सालाना लगभग 60-70 फिल्मों का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि रंगमंच उद्योग आज अच्छी स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा, ''जब मैं फिल्में कर रहा था, तो कई बार ऐसा होता था जब 1.5 करोड़ रुपये के बजट वाली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगभग 30-35 करोड़ रुपये कमाती थी। मेरी पहली फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसावाला' ने 56 करोड़ रुपये कमाए। आज लोग सिनेमाघरों में फिल्म देखने नहीं आ रहे हैं। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि मालिकों की भी सिनेमा के बिजनेस में रुचि नहीं है। लेकिन भोजपुरी सिनेमा दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
लोकसभा के लिए तीसरी बार उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे तिवारी ने कहा, ''मैंने बतौर हीरो 100 फिल्में की हैं, लेकिन मेरी किसी भी फिल्म का बजट डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं है। मेरी तीन फिल्मों ने औसतन 56 करोड़ रुपये की कमाई है और तीनों फिल्मों का औसत मुनाफा तीन करोड़ रुपये रहा। मेरा कोई भी फिल्म निर्माता बदहाल होकर सड़क पर नहीं आया। वास्तविकता यह है कि वे महलों में रहने लगे।
'रिंकिया के पापा' और 'जिअ तू बिहार के लाला' सहित 200 से अधिक भोजपुरी गीत गाने वाले तिवारी ने कहा कि ऋतेश पांडे जैसे भोजपुरी गायकों के गानों को ऑनलाइन सुनने वाले हजारों-लाखों में हैं। उन्होंने कहा कि पवन सिंह भी देश में सबसे ज्यादा सुने जाने वाले गायकों के लिहाज से शीर्ष सात-आठ में बने हुए हैं।