इंपैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस अभियान के तहत बिहार की मतदाता सूची से 61 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, विशेष रूप से राजद और इंडिया गठबंधन, ने तीखा विरोध जताया है, इसे लोकतंत्र और मतदान के अधिकार पर हमला करार दिया। वहीं, सत्तापक्ष और चुनाव आयोग ने इसे वैधानिक और आवश्यक कदम बताया है।चुनाव आयोग ने 24 जुलाई 2025 को बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान अभियान के पहले चरण में 99% मतदाताओं को कवर कर लिया गया है। बिहार में कुल 7.89 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 97.30% ने अपने गणना प्रपत्र जमा कर दिए हैं। इन प्रपत्रों को 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित होने वाली प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल होने के लिए अनिवार्य किया गया है।
आयोग के आंकड़ों के अनुसार:
• 61.1 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की संभावना: इनमें 21.6 लाख मृत मतदाता, 31.5 लाख ऐसे मतदाता जो बिहार से बाहर या अन्य विधानसभा क्षेत्रों में पलायन कर चुके हैं, और 7.5 लाख डुप्लिकेट प्रविष्टियां शामिल हैं।
• 11,000 मतदाताओं की जानकारी नहीं: घर-घर सर्वेक्षण के दौरान इन मतदाताओं के बारे में कोई सूचना नहीं मिली।
• 7 लाख मतदाताओं ने प्रपत्र जमा नहीं किए: इन मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जा सकते हैं।
चुनाव आयोग ने मतदाताओं से 11 दस्तावेजों में से एक जमा करने को कहा है, जिसमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, और राशन कार्ड शामिल नहीं हैं। इन दस्तावेजों में जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, या अन्य सरकारी दस्तावेज शामिल हैं। 2003 के बाद मतदाता सूची में शामिल हुए लोगों को अपने माता-पिता के दस्तावेज भी जमा करने होंगे।25 जुलाई 2025 तक मतदाताओं को गणना प्रपत्र जमा करना था।1 अगस्त 2025 को प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित होगी।1 सितंबर 2025 तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी।30 सितंबर 2025 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को राजनैतिक साजिश करार देते हुए कहा, बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण के बहाने बीजेपी के दबाव में चुनाव आयोग द्वारा मतदान के अधिकार और लोकतंत्र पर हमला हो रहा है।उन्होंने इसे एनडीए के पक्ष में मतदाताओं को वंचित करने की कोशिश बताया और 35 विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।तेजस्वी ने 23 जुलाई को चेतावनी दी कि अगर लाखों मतदाताओं के नाम काटने की बेईमानी तय है, तो महागठबंधन विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर सकता है। उन्होंने कहा, हम सभी दलों से बात करेंगे और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
इंडिया गठबंधन ने भी इस अभियान को अलोकतांत्रिक बताया और आज (25 जुलाई) दिल्ली में इसके खिलाफ मार्च निकालने की योजना बनाई है। विपक्ष का आरोप है कि बिहार में बड़ी संख्या में लोग इन 11 दस्तावेजों में से किसी एक के अभाव में मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, खासकर प्रवासी मजदूर और गरीब तबके के है ।उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तेजस्वी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है। उन्होंने तेजस्वी पर बौखलाहट का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष हार के डर से बेवजह हंगामा कर रहा है।चुनाव आयोग ने भी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान एक वैधानिक और पारदर्शी प्रक्रिया है। आयोग ने दावा किया कि मृत, पलायन कर चुके, और डुप्लिकेट मतदाताओं को हटाने से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी।