Saturday 02-May-2026

बिहार में आरजेडी और कांग्रेस का महागठबंधन ,साथ में लड़ेंगे चुनाव

बिहार में आरजेडी और कांग्रेस का महागठबंधन ,साथ में लड़ेंगे चुनाव

पटना :-बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तैयारियां जोरों पर हैं। हाल के दिनों में दोनों दलों के बीच कई दौर की बैठकों और चर्चाओं के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वे महागठबंधन के तहत एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर कुछ पेंच फंसे हुए हैं, लेकिन दोनों पार्टियां एकजुट होकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को टक्कर देने की रणनीति बना रही हैं।

हाल ही में दिल्ली में आरजेडी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्त्वपूर्ण बैठक हुई ,जिसमे बिहार विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की गई। इस बैठक में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी, और अन्य प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सीट बंटवारे, मुख्यमंत्री पद के चेहरे, और चुनावी अभियान की रणनीति को अंतिम रूप देना था।तेजस्वी यादव ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, हम सभी ने एक सकारात्मक चर्चा की है। महागठबंधन के सभी सहयोगी दल 17 अप्रैल को पटना में एक और बैठक करेंगे, जिसमें अंतिम निर्णय लिए जाएंगे। हमारा लक्ष्य बिहार की जनता के हित में एक मजबूत विकल्प पेश करना है।17 अप्रैल को पटना में होने वाली इस बैठक में महागठबंधन के अन्य सहयोगी दलों, जैसे वामपंथी पार्टियों (सीपीआई, सीपीएम, और सीपीआई-एमएल) के साथ भी चर्चा होगी। इस बैठक में सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने और संयुक्त चुनावी अभियान की रूपरेखा तैयार करने पर जोर होगा।बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं, और महागठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीटों का बंटवारा है। आरजेडी, जो महागठबंधन का सबसे बड़ा दल है, अधिकांश सीटों पर दावा कर रही है। सूत्रों के अनुसार, आरजेडी 140-150 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है, जबकि कांग्रेस 70-80 सीटों की मांग कर रही है। वामपंथी दलों को 20-30 सीटें दी जा सकती हैं।

महागठबंधन के सामने एक और बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री पद के चेहरे का चयन है। आरजेडी के तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सबसे प्रमुख चेहरा माना जा रहा है, लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे पर पूरी तरह सहमत नहीं है। कुछ कांग्रेस नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री पद का फैसला चुनाव के बाद होना चाहिए, ताकि गठबंधन की एकता बनी रहे।हाल ही में तेजस्वी यादव ने अपने रुख में नरमी दिखाते हुए कहा कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं और उनका मुख्य लक्ष्य महागठबंधन की जीत है।वहीं, कांग्रेस के कुछ नेताओं, जैसे कन्हैया कुमार, को पार्टी के भीतर एक उभरते हुए चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। राहुल गांधी ने भी हाल ही में बिहार में कन्हैया की ‘पदयात्रा’ का समर्थन किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए नए नेताओं को आगे लाना चाहती है।

महागठबंधन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एनडीए, जिसमें बीजेपी, जेडीयू, और अन्य छोटे दल शामिल हैं, एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतर रहा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में कहा, ‘कांग्रेस और आरजेडी केवल सपने देख रहे हैं। जनता का आशीर्वाद पीएम मोदी और नीतीश कुमार के साथ है।’इसके अलावा, छोटे दलों जैसे विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और अन्य क्षेत्रीय दलों के उभार से महागठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगने की आशंका है। साथ ही, कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह और कन्हैया कुमार जैसे नेताओं के साथ विवाद भी गठबंधन की एकता पर सवाल उठा रहे हैं।