Wednesday 29-Apr-2026

बिहार में वोटर लिस्ट सत्यापन पर घमासान, विपक्ष के साथ साथ सहयोगी दल भी परेशान

बिहार में वोटर लिस्ट सत्यापन पर घमासान, विपक्ष के साथ साथ सहयोगी दल भी परेशान

इम्पैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान ने सियासी हलचल तेज कर दी है। इस अभियान को लेकर न केवल विपक्षी दल, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी दल भी परेशान और नाराज हैं। विपक्ष ने इस प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक और वोटबंदी करार देते हुए निर्वाचन आयोग से मुलाकात की, जबकि सहयोगी दलों ने भी इसकी समयावधि और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू किया है। इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं और उनकी पहचान के लिए 9 दस्तावेजों में से एक की मांग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल योग्य भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हों।हालांकि, इस प्रक्रिया की टाइमिंग और कार्यान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि यह अभियान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू किया गया, जिससे करीब 2 करोड़ मतदाताओं, खासकर प्रवासी मजदूरों और गरीब वर्ग के लोगों का वोटिंग का अधिकार छिन सकता है।

मंगलवार, 1 जुलाई 2025 को, इंडिया गठबंधन के 11 दलों के नेताओं, जिनमें कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल , समाजवादी पार्टी, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी  शामिल हैं, निर्वाचन आयोग के कार्यालय में पहुंचकर इस प्रक्रिया पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इसे चुनावी समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया और दावा किया कि यह अभियान सत्ताधारी दल के इशारे पर शुरू किया गया है।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि 8 करोड़ लोगों से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो गरीब और अशिक्षित लोगों के लिए उपलब्ध कराना मुश्किल है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे वोट का राज़, मतलब चोट का राज़ करार दिया, जबकि कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव इसी मतदाता सूची के आधार पर हुए थे, तो अब अचानक इसकी जरूरत क्यों पड़ी?हैरानी की बात यह है कि सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दल भी इस अभियान से खुश नहीं हैं। जनता दल (यूनाइटेड) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) जैसे दलों ने इस प्रक्रिया की जल्दबाजी और जटिलता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 25 दिनों की समयसीमा में इतने बड़े पैमाने पर सत्यापन असंभव है, जिससे उनके समर्थक मतदाता भी प्रभावित हो सकते हैं।

वोटर लिस्ट सत्यापन ने आम लोगों में भी भारी अफरातफरी मचा दी है। कई लोग, खासकर ग्रामीण और अशिक्षित आबादी, दस्तावेजों की कमी और प्रक्रिया की जटिलता से परेशान हैं। सुपौल, खगड़िया, और बेतिया जैसे जिलों में बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर प्रपत्र बांट रहे हैं, लेकिन लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि कौन से दस्तावेज मान्य होंगे।

शिवहर में डीएम विवेक रंजन मैत्रेय ने लोगों से अपील की है कि वे गणना प्रपत्र भरकर बूथ लेवल ऑफिसर को उपलब्ध कराएं, ताकि उनका नाम सूची में बना रहे। बेतिया में डीएम धर्मेंद्र कुमार ने आंगनबाड़ी सेविकाओं को प्रशिक्षण देकर इस प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश की है।विपक्ष ने इस मुद्दे को और तेज करने का फैसला किया है। इंडिया गठबंधन ने चेतावनी दी है कि अगर यह प्रक्रिया नहीं रुकी, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे। दूसरी ओर, सत्ताधारी और सहयोगी दल भी इस मुद्दे पर एकजुटता की कमी दिखा रहे हैं, जिससे बिहार की सियासत में नया मोड़ आ सकता है।