Wednesday 06-May-2026

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भी गुजारा भत्ता का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भी गुजारा भत्ता का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव रिपोर्टर।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसले में कहा कि मुस्लिम महिलाएं सीआरपीसी की धारा-125 के तहत अपने शौहर से गुजारा भत्ता पाने की हकदार हैं। न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं भरण-पोषण के लिए कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर सकती हैं। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि हम इस प्रमुख निष्कर्ष कि धारा-125 सभी महिलाओं पर लागू होगी के साथ आपराधिक अपील खारिज कर रहे हैं। धारा-125 भरण-पोषण अधिकार से संबंधित पीठ ने कहा कि पूर्ववर्ती सीआरपीसी की धारा-125 के दायरे में मुस्लिम महिलाएं भी आती हैं। यह धारा पत्नी के भरण-पोषण के कानूनी अधिकार से संबंधित है।

पीठ ने कहा कि भरण-पोषण दान नहीं, बल्कि हर शादीशुदा महिला का अधिकार है। सभी शादीशुदा महिलाएं इसकी हकदार हैं, फिर चाहे वे किसी भी धर्म की हों। पीठ ने कहा कि मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 को सीआरपीसी की धारा-125 के धर्मनिरपेक्ष और धर्म तटस्थ प्रावधान पर तरजीह नहीं दी जाएगी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल समद की याचिका खारिज कर दी। तेलंगाना हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता के संबंध में परिवार अदालत के फैसले में दखल देने के समद के अनुरोध को ठुकरा दिया था। समद ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा-125 के तहत गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है और अदालत को मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों को लागू करना होगा।

क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता अब्दुल समद ने तेलंगाना हाईकोर्ट में दलील दी थी कि दंपति ने वर्ष 2017 में पर्सनल लॉ के अनुसार तलाक ले लिया था। उसके पास तलाक प्रमाणपत्र भी है, लेकिन परिवार अदालत ने इस पर विचार नहीं किया और उसे पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी कर दिया। हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने पर समद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।