Saturday 09-May-2026

सुबह कांग्रेस से इस्तीफा दिया गौरव वल्लभ ने, दोपहर में थामा भाजपा का दामन

सुबह कांग्रेस से इस्तीफा दिया गौरव वल्लभ ने, दोपहर में थामा भाजपा का दामन

कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने बृहस्पतिवार को सुबह-सुबह पार्टी से इस्तीफा दे दिया और फिर दोपहर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। वल्लभ के अलावा कांग्रेस की बिहार इकाई के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता उपेन्द्र प्रसाद ने भी पार्टी महासचिव विनोद तावड़े की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। वल्लभ ने यह कहते हुए कांग्रेस से इस्तीफा दिया कि वह सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकते तथा वेल्थ क्रिएटर्स (पूंजी का सृजन करने वालों) को गाली नहीं दे सकते।

वल्लभ ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखा त्यागपत्र सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा किया। उन्होंने कहा कि पार्टी जिस तरह से दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए वह खुद को सहज महसूस नहीं कर पा रहे थे। वल्लभ कई महीनों से पार्टी की ओर से टेलीविजन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो रहे थे और लंबे समय से उनकी कोई प्रेस वार्ता भी नहीं हुई थी।

वल्लभ ने त्यागपत्र में यह दावा भी किया कि वर्तमान में आर्थिक मामलों पर कांग्रेस का रुख हमेशा 'वेल्थ क्रिएटर्स' को नीचा दिखाने वाला रहा है तथा देश में होने वाले हर विनिवेश पर पार्टी का नजरिया नकारात्मक रहा है। उनका कहना है कि आर्थिक मुद्दों पर पार्टी के रुख को लेकर भी वह घुटन महसूस कर रहे थे। भाजपा में शामिल होने के बाद वल्लभ ने कांग्रेस की आर्थिक नीतियों को लेकर उस पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस निजीकरण, उदारीकरण, वैश्वीकरण को गाली देती है जबकि पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह और पी वी नरसिम्हा राव ने इसे आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा, उन नीतियों को गाली...। कोई व्यवसाय करे, उसे गाली... । कोई विनिवेश में सहभागिता करे, उसको गाली... । एयर इंडिया को कोई कंपनी खरीदे तो वह गलत... आज आप इसलिए निजीकरण, उदारीकरण और वैश्वीकरण को गलत बोलते हो क्योंकि एक ऐसे व्यक्ति इन्हें आगे लेकर जा रहे हैं जिन्हें आपको सुबह से शाम तक गाली देनी है।

उन्होंने कहा कि देश में संपत्ति का सृजन अपराध नहीं हो सकता। वल्लभ ने कहा कि उन्होंने हमेशा मुद्दों पर आधारित राजनीति की और मोदी के विकसित भारत के एजेंडे से आकर्षित हुए हैं। उन्होंने कहा कि वह हमेशा से अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण चाहते थे और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में नहीं जाने के कांग्रेस के फैसले को वह स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, कांग्रेस नेताओं और उसके सहयोगियों ने सनातन धर्म पर सवाल उठाए लेकिन पार्टी ने कोई जवाब नहीं दिया।