उच्चतम न्यायालय ने वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के दक्षिणी तहखाने में पूजा करने पर रोक लगाने से सोमवार को इनकार कर दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मस्जिद परिसर में हिंदू और मुस्लिम पक्षों द्वारा किए जाने वाले धार्मिक रस्मों को लेकर ''यथास्थिति'' बनाए रखने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ज्ञानवापी मसाजिद इंतजामिया कमेटी की नयी याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें मस्जिद के दक्षिणी तहखाने में हिंदू पक्ष को पूजा करने की अनुमति देने संबंधी अधीनस्थ अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया था।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मुस्लिम और हिंदू, दोनों पक्ष मस्जिद परिसर के अंदर अपने-अपने धार्मिक अनुष्ठान 'बिना किसी बाधा' के कर रहे हैं और इसलिए, फिलहाल यथास्थिति ही न्याय के उद्देश्य को पूरा करेगी। प्रधान न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पुजारी शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास से भी मसाजिद कमेटी की याचिका पर 30 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने को कहा है। न्यायालय ने कहा, ''इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि 17 जनवरी, 2024 और 31 जनवरी, 2024 के आदेशों के बाद मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज निर्बाध रूप से अदा की जा रही है जबकि हिंदू पुजारी द्वारा पूजा-पाठ तहखाना तक सीमित है, इसलिए यथास्थिति बनाए रखना उपयुक्त होगा ताकि दोनों समुदाय उपरोक्त शर्तों के अनुसार अपनी-अपनी पद्धति से उपासना कर सकें।''
शीर्ष अदालत की पीठ में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने कहा, ''हिंदुओं द्वारा धार्मिक अनुष्ठान 31 जनवरी, 2024 के आदेश में निहित निर्देशों के अनुसार होंगे... उपरोक्त शर्तों से प्राप्त यथास्थिति में इस अदालत की पूर्व मंजूरी और अनुमति प्राप्त किए बिना कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने 'गूगल अर्थ' के जरिये ढांचे की तस्वीरें देखने के बाद कहा कि तहखाने में प्रवेश दक्षिण की ओर से है जबकि नमाज अदा करने के लिए मस्जिद में प्रवेश करने के वास्ते उत्तर की तरफ से सीढ़ियां हैं।
सुनवाई शुरू होते ही अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दीवानी अदालत के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया और कहा कि मस्जिद परिसर के भीतर पूजा करने की अनुमति दी जा रही है। अहमदी ने कहा कि इससे केवल तनाव बढ़ेगा। उन्होंने दलील दी, इतिहास ने हमें कुछ सबक भी सिखाए हैं जहां आश्वासनों के बावजूद हिंसा हुई है। यह एक बेहद खराब आदेश है। समुदाय शांतिपूर्वक रह रहे हैं। अब इसे पाने की जिद क्यों? 30 वर्षों से स्थिति बहुत सामान्य है।