Saturday 09-May-2026

विवाह समारोहों में हर्ष फायरिंग दुर्भाग्यपूर्ण, अक्सर होते हैं विनाशकारी परिणाम: सुप्रीम कोर्ट

विवाह समारोहों में हर्ष फायरिंग दुर्भाग्यपूर्ण, अक्सर होते हैं विनाशकारी परिणाम: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को विवाह समारोहों में जश्न मनाते हुए गोलीबारी किए जाने के मामलों को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया और कहा कि इनके अक्सर विनाशकारी परिणाम होते हैं। अदालत ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें उसने 2016 में एक विवाह समारोह के दौरान गोलीबारी में एक अन्य व्यक्ति की हत्या के आरोपी की सजा को रद्द कर दी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा, “विवाह समारोहों के दौरान हर्ष फायरिंग करना हमारे देश में एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन प्रचलित प्रथा है। वर्तमान मामला इस तरह की अनियंत्रित व अनुचित हर्ष फायरिंग के विनाशकारी परिणामों का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

पीठ ने निचली अदालत और इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा शाहिद अली को दी गई आजीवन कारावास की सजा को पलट दिया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 304 भाग 2 (गैर इरादतन हत्या) के तहत दोषी ठहराया। वह पहले ही आठ साल जेल में काट चुका है, लिहाजा उसे रिहा कर दिया गया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 17 मार्च, 2016 को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में अली के हर्ष फायरिंग करने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जिसके बाद गुलाब अली नामक व्यक्ति ने जसराना थाने में शाहिद अली के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी।