हाथरस सत्संग हादसे में जान गंवाने वाले 102 मृतकों के शवों की पोस्टमार्ट रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर लोगों की मौतों का कारण पसली टूटना, फेफड़े फट जाने व भगदड़ में दम घुटने से बताया आया है। अलीगढ़, हाथरस, एटा में इन सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम कराने के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पसली टूटना, सिर, हाथ-पैरों व शरीर के अंगों में चोट लगना इस बात को दर्शाता है कि सत्संग स्थल पर भगदड़ में कैसे लोग एक-दूसरे को रौंदते हुए चलते गए। जो एक बार भीड़ में गिरा, वह दोबारा नहीं उठ पाया। यही वजह रही कि लाखों लोगों की भीड़ जमीन पर गिरने वाले श्रद्धालुओं को कीड़े-मकौड़ों की तरह कुलचती जा रही है। इस भीड़ में कोई किसी की चीख नहीं सुन पा रहा था। घटना के शुरूआती दौर में अधिकतर श्रद्धालुओं की मौत की वजह गर्मी, उमस से होना माना जा रहा था लेकिन पीएम रिपोर्ट से साफ है कि लोगों का दम भी घुटा भी तो वह लाखों लोगों की भीड़ में फंसने की वजह से। तमाम श्रद्धालुओं को संभलने का जरा भी मौका नहीं मिल सका।
हाथरस जिले के सिकंदराराऊ के रतिभानपुर गांव के फुलरई मुगलगढ़ी में नारायण हरि साकार के सत्संग में शामिल होने के लिए बुलंदशहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गए थे। इनमें दो किशोरियों और चार महिलाओं सहित छह लोगों की मौत हो गई। कुछ लोगों के घायल होने की भी सूचना है। शवों के घरों पर पहुंचने के बाद परिजन बिलख उठे। प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में शवों का अंतिम संस्कार किया गया।
इस बीच हाथरस में मची भगदड़ की घटना की जांच के लिए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की की गई। याचिका में शीर्ष अदालत के किसी सेवानिवृत्त जज की निगरानी में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। याचिका अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई। याचिका में घटना पर स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और लापरवाही बरतने के लिए अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।