Thursday 30-Apr-2026

ISRO की एक और उपलब्धि, SSLV-D3 ने EOS-08 और यात्री सैटेलाइट का किया सफल प्रक्षेपण, पर्यावरण और आपदा की देगा जानकारी

ISRO की एक और उपलब्धि, SSLV-D3 ने EOS-08 और यात्री सैटेलाइट का किया सफल प्रक्षेपण, पर्यावरण और आपदा की देगा जानकारी

नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव टीम।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक और सफल मिशन में शुक्रवार सुबह लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) का उपयोग करके नवीनतम पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-8 और एक यात्री उपग्रह का निर्धारित कक्षा में प्रक्षेपण किया। देर रात 0247 बजे शुरू हुई 6.5 घंटे की छोटी और सफल उलटी गिनती के बाद एसएसएलवी-डी3 ने शार रेंज के पहले लांच पैड से निर्धारित समय 09:17 बजे अपनी तीसरी और अंतिम विकासात्मक शानदार उड़ान भरी। यह अपने साथ 175.5 किलोग्राम वजनी ईओएस-08 और एसआर-0 डेमोसैट को पेलोड लेकर गया है।

उड़ान भरने के लगभग 17 मिनट बाद 120 टन लिफ्ट ऑफ मास वाले 34 मीटर लंबे एसएसएलवी-डी3 ने ईओएस-08 और स्पेस किड्ज़ इंडिया द्वारा विकसित 0.2 किलोग्राम वजनी एसआर-0 डेमोसैट को 475 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा में भूमध्य रेखा पर 37.4 डिग्री के झुकाव के साथ सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया। यह मिशन प्रतिष्ठित प्रथम मानव अंतरिक्ष उड़ान गगनयान मिशन के लिए अधिक महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करेगा और क्रू मॉड्यूल के व्यूपोर्ट पर पेलोड में से एक गामा विकिरण के लिए उच्च खुराक अलार्म सेंसर के रूप में काम करेगा। मिशन की कामयाबी के बाद मिशन नियंत्रण केंद्र में खुशी का माहौल देखा गया। वहां मौजूद इसरो के अध्यक्ष एस.सोमनाथ सहित वैज्ञानिकों ने एक-दूसरे को बधाई दी।

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वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए सोमनाथ ने कहा कि एसएसएलवी-डी3/ईओएस-08 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। उड़ान भरने के बाद दोनों उपग्रहों को बिल्कुल सटीक कक्षा में स्थापित कर दिया गया। इसरो ने मिशन को पहले गुरुवार के लिए निर्धारित किया था लेकिन इसे बाद में शुक्रवार के लिए पुनर्निधारित किया गया। इसरो के अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि उपग्रहों को सटीक तरीके से कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। कोई विचलन नहीं है और सौर पैनल तैनात हैं। एसएसएलवी की अंतिम विकासात्मक उड़ान के पूरा होने के साथ ही यह तकनीक अब उद्योग को हस्तांतरित कर दी जाएगी।

सोमनाथ ने मिशन की सफलता के लिए पूरी एसएसएलवी टीम की भी सराहना की। आज की उपलब्धि के साथ एसएसएलवी परिचालन चरण में प्रवेश कर गया है। इसरो ने कहा कि यह मिशन एसएसएलवी विकास परियोजना को पूरा करता है और भारतीय उद्योग और एनएसआईएल के परिचालन मिशन को सक्षम बनाता है। ईओएस-08 मिशन का उद्देश्य एसएसएलवी वाहन प्रणालियों के दोहराए जाने योग्य उड़ान प्रदर्शन को प्रदर्शित करना था। ईओएस -08 मिशन के प्राथमिक उद्देश्यों में एक माइक्रोसैटेलाइट को डिजाइन करना और विकसित करना, माइक्रोसैटेलाइट बस के साथ संगत पेलोड उपकरण बनाना और भविष्य के परिचालन उपग्रहों के लिए आवश्यक नई तकनीकों को शामिल करना शामिल है।