प्रयागराज:- इस वर्ष महाकुंभ में वसंत पंचमी के दिन करीब 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी संगम में स्नान किया। यह दिन विशेष रूप से कुम्भ के पांच प्रमुख स्नान दिनों में से एक है। वसंत पंचमी का महत्व इस दिन विशेष रूप से सरस्वती पूजा होती है, और श्रद्धालु अपने ज्ञान और विद्या की देवी से आशीर्वाद लेने के लिए इस पवित्र अवसर पर संगम में स्नान करते हैं। इस दिन का महत्व न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी है, क्योंकि यह भारतीय परंपरा और आस्थाओं का प्रतीक है।महाकुंभ में विभिन्न अखाड़ों का स्नान विशेष होता है। वसंत पंचमी के दिन सबसे पहले निर्मल अखाड़ा के साधु संतों ने स्नान किया। इसके बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रमुख साधु संतों ने भी संगम में पवित्र डुबकी लगाई। वसंत पंचमी का दिन इन अखाड़ों के लिए एक विशेष अवसर होता है, जहां वे अपने अनुयायियों के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान को पूरा करते हैं।इस साल उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ नए नियम और प्रशासनिक उपाय लागू किए हैं। साथ ही, संगम में स्नान के दौरान किसी भी प्रकार की भारी भीड़ से बचने के लिए समय-सारणी बनाई गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किए गए।इसके अलावा, सुरक्षा बल और हेल्प डेस्क की तैनाती की गई थी ताकि कोई भी श्रद्धालु परेशानी से बच सके। इमरजेंसी सेवाएं और मेडिकल टीमें हर समय उपलब्ध थीं। प्रशासन ने नदी में स्नान के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए थे, जिसमें लाइफगार्ड्स की तैनाती भी शामिल थी। श्रद्धालुओं के लिए स्मार्ट कार्ड और दृष्टि दूरी चिन्ह लगाए गए थे ,ताकि उनके मार्गदर्शन में कोई असुविधा न हो।