इंपैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार विधानसभा के मानसून सत्र का चौथा दिन हंगामेदार रहा। आज नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट सदन में पेश की गई, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, और वित्तीय प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बिहार सरकार की कई खामियां सामने आईं। इस दौरान मतदाता सूची पुनरीक्षण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न हुआ।
CAG की ताजा रिपोर्ट, जो 28 नवंबर 2024 को पेश की गई थी, ने बिहार सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्रबंधन में कई अनियमितताओं को उजागर किया। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
1. स्वास्थ्य सेवाओं में कमियां:
• बिहार के स्वास्थ्य ढांचे में गंभीर खामियां सामने आईं। आपातकालीन ऑपरेशन थिएटर ,कार्यात्मक वेंटिलेटर, और डायग्नोस्टिक सुविधाओं की कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया।
• सभी 10 जांचे गए उप-मंडलीय अस्पतालों , रेफरल अस्पतालों (RHs), और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रक्त भंडारण इकाइयां गैर-कार्यात्मक थीं, जिससे मरीजों को जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
• बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 2016-22 के दौरान आवश्यक 387 दवाओं में से केवल 14-63% के लिए ही आपूर्तिकर्ताओं के साथ अनुबंध किए। इसकी वजह से ओपीडी में 21-65% और आईपीडी में 34-83% दवाओं की अनुपलब्धता रही।
• मातृ मृत्यु दर , नवजात मृत्यु दर , और कुल प्रजनन दर जैसे स्वास्थ्य संकेतकों में बिहार का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत और लक्ष्यों से काफी नीचे रहा।
2. वित्तीय अनियमितताएं:
• अप्रैल 2018 से फरवरी 2020 तक 629 मामलों में 3658.11 करोड़ रुपये के राजस्व का अवनिर्धारण हुआ, जिसमें से सरकार ने 1648 मामलों में 1336.65 करोड़ रुपये के नुकसान को स्वीकार किया।
• बिहार भवन और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन में 28 महीने की देरी और 2017-22 के दौरान बजट तैयार न करने से 1650.06 करोड़ रुपये का धन जमा हो गया।
3. शिक्षा और कल्याण योजनाएं:
• 2017-22 के बीच बिहार के विश्वविद्यालयों के बजट का 18% उपयोग नहीं हुआ, जिससे शिक्षा और कल्याण योजनाओं पर असर पड़ा।
• नीट निर्मल परियोजना के कार्यान्वयन में देरी हुई, और विश्व बैंक द्वारा प्रदान किए गए 803 करोड़ रुपये के 50% हिस्से का उपयोग समय पर नहीं हुआ।
CAG रिपोर्ट के साथ-साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर विपक्ष ने सत्तापक्ष को घेरने की कोशिश की। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को लोकतंत्र और मतदान के अधिकार पर हमला करार देते हुए कहा, बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण के बहाने बीजेपी के दबाव में चुनाव आयोग द्वारा मतदान के अधिकार और लोकतंत्र पर हमला हो रहा है।उन्होंने इसे राजनैतिक रूप से प्रेरित कदम बताया और महागठबंधन के विधायकों ने इस मुद्दे पर सदन के बाहर और भीतर प्रदर्शन किया।विपक्षी नेताओं ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर काले पोशाक में प्रदर्शन किया और प्ले कार्ड्स के साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध जताया। विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव ने विपक्ष पर हंगामा करने का आरोप लगाते हुए कार्यवाही को कई बार स्थगित किया।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए कई कार्य किए हैं। उन्होंने तेजस्वी को उनके माता-पिता के कार्यकाल की याद दिलाई और कहा, पहले लोग रात में पटना में भी बाहर निकलने से डरते थे।स्वास्थ्य सचिव संजय कुमार सिंह ने CAG की स्वास्थ्य संबंधी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि वेंटिलेटर की कोई कमी नहीं है और कोविड से पहले की तुलना में अब 16,000 से अधिक ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले तीन वर्षों में 50,000 लोगों की भर्ती की गई और अगले छह महीनों में 40,000 और पदों पर भर्ती होगी।