इम्पैक्ट लाइव टीम: मुजफ्फरपुर, बिहार में 26 मई को एक नाबालिग दलित लड़की के साथ हुए बलात्कार और क्रूर हमले के बाद उसकी मृत्यु ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। 9 से 11 वर्ष की आयु की इस बच्ची को मक्के के खेत में चॉकलेट का लालच देकर ले जाया गया, जहां उसके साथ बलात्कार किया गया और चाकू से गला रेतकर हत्या का प्रयास किया गया। गंभीर चोटों के साथ उसे पहले मुजफ्फरपुर के श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (SKMCH) में भर्ती किया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उसे पटना मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (PMCH) रेफर किया गया। पीड़िता की मां और स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया कि PMCH में समय पर इलाज न मिलने और कई घंटों तक एंबुलेंस में इंतजार कराने के कारण बच्ची की जान चली गई।
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी रोहित साहनी को उसी रात गिरफ्तार कर लिया। मुजफ्फरपुर के ग्रामीण पुलिस अधीक्षक विद्या सागर ने बताया कि पीड़िता के गले और शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं, जिसके कारण उसकी आवाज की नसें क्षतिग्रस्त हो गईं और वह बोल नहीं पा रही थी। उसने अपने माता-पिता को सांकेतिक भाषा में अपनी आपबीती बताई। महिला थाना प्रभारी अदिति कुमारी ने पुष्टि की कि बलात्कार के आरोप में मामला दर्ज किया गया है और जांच चल रही है। इस घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इस मामले ने बिहार में राजनीतिक उबाल ला दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इसे "संस्थागत हत्या" करार देते हुए नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज मिलता, तो बच्ची की जान बच सकती थी। राजेश राम ने दावा किया कि पीड़िता को शनिवार को PMCH में पांच घंटे तक एंबुलेंस में इंतजार करना पड़ा क्योंकि बेड उपलब्ध नहीं था। दूसरी ओर, PMCH के अधीक्षक डॉ. अभिजीत सिंह ने दावा किया कि अस्पताल की ओर से कोई लापरवाही नहीं हुई और पीड़िता को तुरंत चिकित्सा दी गई।
मुजफ्फरपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस घटना के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय लोगों और पीड़िता के परिवार ने भी न्याय की मांग की है। इस घटना ने बिहार में बढ़ते अपराध, खासकर महिलाओं और दलितों के खिलाफ हिंसा, को लेकर जनता में आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग सरकार और अस्पताल प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।