Thursday 19-Feb-2026

वाघा बार्डर की तर्ज पर बिहार के पूर्णिया में आधी रात को फहराया जाता है तिरंगा, 1947 से चली आ रही परंपरा

वाघा बार्डर की तर्ज पर बिहार के पूर्णिया में आधी रात को फहराया जाता है तिरंगा, 1947 से चली आ रही परंपरा

पूर्णिया, इंपैक्ट लाइव टीम।

भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय वाघा बार्डर के अलावा बिहार के पूर्णिया जिले के झंडा चौक पर हर साल आधी रात को तिरंगा लहराया जाता है। घड़ी की सूई के 12:01 पर पहुंचते ही यहां झंडोत्तोलन किया जाता है। यह परंपरा 1947 से ही चली आ रही है। दरअसल, साल 1947 में जब घड़ी की सुई 12 बज कर 01 मिनट पर पहुंची, ठीक उसी समय भारत के आजादी की घोषणा रेडियो पर की गई थी। उसी समय पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी और उनके दादा रामेश्वर प्रसाद सिंह, रामरतन साह और शमशुल हक के साथ मिलकर मध्य रात्रि में भह्वा बाजार में झंडा फहराया था। तभी से हर साल यहां मध्य रात्रि में झंड फहराने की परंपरा चली आ रही है।

इस समारोह को राजकीय दर्जा दिए जाने की मांग भी लंबे समय से हो रही है। समाजसेवी सोनी सिंह के मुताबिक हर साल मध्य रात्रि को यहां तिरंगा लहराया जाता है। इस समारोह को राजकीय दर्जा देने की जरूरत है। इसको लेकर झंडा चौक पर छह बजे परिचर्चा भी आयोजित की जा रही है। इसमें मेयर-डिप्टी मेयर भाग लेंगी। जनप्रतिनिधियों के अलावा सभी प्रबुद्ध जन और गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया गया है।

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समारोह को लेकर झंडा चौक को सजाया संवारा गया है। नगर निगम की ओर से झंडा चौक के नीचे टूटे-फूटे फर्श, स्टील को दुरुस्त किया गया है। वहीं लाइट की भी मरम्मत की गयी है ताकि देर रात्रि प्रकाश की कोई कमी नहीं रहे। स्थानीय लोग भी आधी रात को ध्वजारोहण में शामिल होते हैं। यह परंपरा वर्ष 1947 से चली आ रही है। इसके अलावा शहर के जनप्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचते हैं।

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