Sunday 07-Jun-2026

सरकारी अस्पताल की लापरवाही: जीवित नवजात को मृत घोषित करने का मामला उजागर

सरकारी अस्पताल की लापरवाही: जीवित नवजात को मृत घोषित करने का मामला उजागर

इम्पैक्ट लाइव टीम

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां लौरिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक नवजात शिशु को मृत घोषित कर दिया गया। यह चौंकाने वाला मामला तब प्रकाश में आया जब परिजनों ने बच्चे की हालत पर संदेह जताया और उसे निजी नर्सिंग होम ले गए, जहां ऑक्सीजन देने पर बच्चा जीवित पाया गया।

प्रसूता ज्योति कुमारी, जो बसवरिया गांव के शिव बैठ की पत्नी हैं, को बुधवार दोपहर प्रसव पीड़ा होने पर लौरिया स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। लगभग एक घंटे बाद उन्होंने एक नवजात को जन्म दिया। ड्यूटी पर तैनात एएनएम राधिका कुमारी ने बच्चे में कोई हलचल न देख उसे मृत घोषित कर दिया और ड्यूटी पर मौजूद आयुष चिकित्सक से भी पुष्टि करवा ली।

परिजनों ने इसका विरोध किया और कहा कि बच्चे की नाभि से खून आ रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह जीवित हो सकता है। उन्होंने डॉक्टर से दोबारा जांच करने का अनुरोध किया, लेकिन उन्हें डांटकर भगा दिया गया। इसके बाद, अस्पताल के रिकॉर्ड में नवजात को 'स्टिलबर्थ' यानी मृत जन्मा बच्चा बताकर डिस्चार्ज कर दिया गया।

परिजन संतुष्ट नहीं हुए और तुरंत नजदीकी निजी नर्सिंग होम पहुंचे, जहां डॉक्टर ने नवजात को ऑक्सीजन दिया। कुछ ही देर में बच्चा हरकत करने लगा और उसे पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया गया। यह देख परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

इस पूरे मामले को लेकर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, आयुष चिकित्सक ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने खुद नवजात को मृत घोषित नहीं किया था, बल्कि एएनएम के कहने पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे।

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