पटना, इंपैक्ट लाइव टीम।
बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। महागठबंधन के विधायकों ने बैनर-पोस्टर लेकर विधानसभा में प्रदर्शन किया। विपक्ष ने 65 प्रतिशत आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में डालने की मांग कर रहे हैं।
आरजेडी के विधायक एवं मुख्य सचेतक अख्तरुल इस्लाम शाहिन ने कहा कि संविधान की नौवीं अनुसूची में डाला जाए। आज सदन में हम लोग चर्चा के लिए कार्यस्थगन का प्रस्ताव देंगे। नीतीश कुमार के दम पर केंद्र सरकार चल रही, लेकिन सीएम करवा नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक काला विधेयक है। विधानसभा से नीतीश कुमार खिलाफ में प्रस्ताव पारित करें।
आरजेडी और कांग्रेस के तमाम विधायकों ने हाथों में पोस्टर लेकर नीतीश सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके साथ ही विधायकों ने हाथों में पोस्टर लेकर कहा कि बीजेपी आरक्षण की मूल भावना को कमजोर कर रही है। इसका विरोध जारी रहेगा।
विधानसभा परिसर में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि हमने आरक्षण की सीमा 75 प्रतिशत की। हमने केंद्र से मांग की थी कि इसे शेड्यूल 9 में डाला जाए। भाजपा चाहती तो इसे शेड्यूल 9 में ला सकते थे। लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया। सरकार अगर पक्ष में है तो नया कानून लाए। विधानसभा की कमेटी बनाकर कैबिनेट से नया बिल लेकर आए, हम बिल पास कर देंगे।
दरअसल, बिहार में महागठबंधन सरकार जब थी तब बिहार सरकार 500 करोड़ रुपये खर्च कर खुद से जातीय गणना कराई थी। इसके बाद आरक्षण का दायरा बढ़ा था। 50 से 65 फीसद किया गया था, लेकिन पटना हाईकोर्ट में मामला चल गया। पटना हाईकोर्ट ने 65 फीसद आरक्षण को रद्द कर दिया। बिहार सरकार सुप्रीम कोर्ट भी गई, लेकिन वहां से झटका लग गया। अब महागठबंधन दबाव बना रहा है कि संविधान की 9वीं अनुसूची में डालिए।