Thursday 19-Feb-2026

बिहार में मनाई गई माँ सावित्री बाई फुले की जयंती

बिहार में मनाई गई माँ सावित्री बाई फुले की जयंती

पटना: बिहार के विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों में भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 194वां जयंती शुक्रवार को मनाई गई| मां सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस के अवसर पर महिला सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया|

                                                                   सावित्रीबाई फुले न केवल भारत में शिक्षा की अलख जगाई, बल्कि समाज सुधार का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया था जो आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा| सावित्रीबाई का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सातारा जिले के एक छोटे से गाँव नायगाँव में हुआ था| वह एक साधारण किसान परिवार से थीं| मात्र 9 वर्ष की आयु में उनका विवाह ज्योतिराव फुले से हुआ. यह वही ज्योतिराव थे, जिन्होंने न केवल सावित्रीबाई को शिक्षित किया, बल्कि उन्हें समाज सुधार की ओर प्रेरित किया| जिस समय महिलाओं को पढ़ने का अधिकार नहीं था, उस दौर में सावित्रीबाई ने शिक्षा को अपना हथियार बनाया| सामाजिक विरोध का सामना करते हुए, सावित्रीबाई ने 1848 में पुणे में भारत का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया था|

उन्होंने न केवल लड़कियों को शिक्षित किया, बल्कि दलित और पिछड़े वर्गों के बच्चों के लिए भी स्कूल खोले| वह विधवाओं और बलात्कार पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए भी हमेशा आगे रहीं| उनका जीवन समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत था|
सावित्रीबाई न केवल एक शिक्षिका थीं, बल्कि एक उत्कृष्ट कवयित्री भी थीं| उनकी कविताएँ ‘काव्यफुले’ और ‘बावनकशी सुबोध रत्नाकर’ समाज में जागरूकता फैलाने और समानता का संदेश देने का काम करती हैं| उनकी रचनाएँ आज भी हमें प्रेरित करती हैं|
सावित्रीबाई शिक्षिका, कवयित्री होने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहीं| 1897 में जब पुणे में प्लेग फैला, तब सावित्रीबाई ने अपना जीवन मरीजों की सेवा में समर्पित कर दिया| उन्होंने अपने दत्तक पुत्र के साथ एक प्लेग केंद्र खोला| इसी दौरान वह खुद इस बीमारी की चपेट में आ गईं और 10 मार्च 1897 को इस दुनिया से विदा हो गईं, लेकिन उनके त्याग और सेवा का यह अध्याय अमर हो गया|

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