शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (वर्ष 2016) की मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मीना कुमारी एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने सरकार को 28 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। गुरुवार को अदालत ने प्रार्थी, झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग और सरकार का पक्ष सुना। सरकार ने अदालत से कुछ बिंदुओं पर जवाब देने का समय लिया।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कई सफल अभ्यर्थी जिनका अंक उनसे कम है, उनकी भी नियुक्ति की गई है। इसका विरोध करते हुए जेएसएससी के अधिवक्ता संजय पिपरवाल एवं प्रिंस कुमार ने कोर्ट को बताया कि प्रार्थियों का यह कथन गलत है कि प्रार्थी का प्राप्तांक राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट में अंतिम चयनित अभ्यर्थी से कम है।
जेएसएससी के अधिवक्ता ने कहा कि प्रार्थी अपनी दलील सही ठहराने के लिए वैसे लोगों के उदाहरण दे रहे हैं, जिनकी नियुक्ति जिला स्तरीय मेरिट लिस्ट के आधार पर हुई थी, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत प्रोटेक्टेड थे। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सत्यजीत कुमार के मामले में दिए गए आदेश के आलोक में जेएसएससी ने राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट के तहत नियुक्ति की अनुशंसा की है। नियुक्ति की अनुशंसा में किसी तरह की खामी नहीं है। प्रार्थियों ने कोई स्पष्ट तथ्य नहीं लाया, जिससे साबित हो कि उनकी नियुक्ति की अनुशंसा नहीं किया जाना गलत है।