इम्पैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया ने न केवल राज्य में हलचल मचाई, बल्कि अब यह पूरे देश में लागू होने जा रही है। निर्वाचन आयोग ने 14 जुलाई 2025 को घोषणा की कि बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया को एक मॉडल के रूप में लेते हुए, अगले महीने से पूरे भारत में मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण शुरू किया जाएगा। इस कदम का मकसद मतदाता सूची को शुद्ध करना, अयोग्य मतदाताओं जैसे मृतक, प्रवासी, या अवैध विदेशी को हटाना, और सभी पात्र नागरिकों को शामिल करना है। इस घोषणा ने राजनीतिक दलों और आम जनता में व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
विशेष गहन पुनरीक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें निर्वाचन आयोग मतदाता सूची की गहन जाँच करता है। इसमें बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं, जिसमें नाम, पता, जन्मतिथि, आधार नंबर, और वोटर पहचान पत्र की जानकारी दर्ज की जाती है। बिहार में यह प्रक्रिया 15 दिनों से चल रही थी, और अब तक 80% से अधिक मतदाताओं ने अपनी जानकारी जमा कर दी है।बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए, जिसमें नेपाल, बांग्लादेश, और म्यांमार के लोगों के नाम मतदाता सूची में पाए गए। इसने विपक्षी दलों, खासकर महागठबंधन कांग्रेस और आरजेडी, को आलोचना का मौका दिया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे चुनावी हेरफेर और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2025 को विशेष गहन पुनरीक्षण को जारी रखने की अनुमति दे दी।
निर्वाचन आयोग ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण की सफलता को देखते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का निर्णय लिया है। X पर एक पोस्ट के अनुसार, आयोग ने सभी राज्यों में अपनी चुनावी मशीनरी को सक्रिय कर दिया है, और अगस्त 2025 से यह प्रक्रिया शुरू होगी। बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण को एक परीक्षण मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है।
आयोग के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण का लक्ष्य है:
• पात्र मतदाताओं को शामिल करना: 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना।
• अयोग्य नाम हटाना: मृतक, प्रवासी, या अवैध विदेशी नागरिकों के नाम हटाना।
• सटीकता सुनिश्चित करना: आधार नंबर और अन्य दस्तावेजों के जरिए मतदाता जानकारी को सत्यापित करना।
1 अगस्त 2025 को बिहार में मतदाता सूची का प्रारूप जारी होगा, और अंतिम सूची 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित की जाएगी। अन्य राज्यों में भी इसी तरह का समय-सीमा निर्धारित की जाएगी।