Saturday 09-May-2026

हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी का आदेश स्वीकार करने से मना किया, ईडी का आरोप

हेमंत सोरेन ने गिरफ्तारी का आदेश स्वीकार करने से मना किया, ईडी का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दावा किया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता हेमंत सोरेन को उनकी गिरफ्तारी के बारे में सूचना बुधवार शाम पांच बजे दी गई थी, लेकिन वह आदेश स्वीकार करने को अनिच्छुक थे। ईडी ने कहा कि वह पहले मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपना चाहते थे। ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि गिरफ्तार किये गए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अवैध कब्जे व उपयोग में यहां करीब 8.5 एकड़ कुल क्षेत्रफल के एक दर्जन भूखंड हैं और यह धन शोधन रोधी कानून के तहत अपराध से अर्जित आय है।

संघीय एजेंसी ने उनकी हिरासत का अनुरोध करते हुए एक विशेष पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) अदालत से कहा कि उन्हें (सोरेन को) शाम करीब पांच बजे उनकी गिरफ्तारी की सूचना दी गयी थी। लेकिन, मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा झारखंड के माननीय राज्यपाल को सौंपने से पहले वह आदेश प्राप्त करने को अनिच्छुक थे। एजेंसी ने गिरफ्तारी आदेश में कहा कि सोरेन को शाम 5 बजे अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को अपनी गिरफ्तारी के बारे में सूचित करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने बृहस्पतिवार को सोरेन को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। ईडी ने 10 दिन की हिरासत में देने का अनुरोध किया था।

एजेंसी ने रिमांड नोट में आरोप लगाया कि सोरेन बिना सहमति के और उस वक्त जारी कार्यवाही पूरी किए बिना राजभवन) के लिए निकल गए। ईडी ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी का लिखित आधार उन्हें रात 10 बजे दिया जा सका। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी तलाशी लिये जाने के दौरान एक धार्मिक लॉकेट और एक अंगूठी निकालने से इनकार दिया।

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के शीघ्र बाद हेमंत सोरेन को ईडी ने बुधवार रात गिरफ्तार कर लिया था। एजेंसी ने दिन में उनसे सात घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी। झामुमो नेता ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए बृहस्पतिवार को दिल्ली में उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की।

हेमंत सोरेन के खिलाफ संघीय एजेंसी ने जो आपराधिक मामला दर्ज किया है वह जून 2023 की ईसीआईआर (प्राथमिकी के समान) से उपजा है। इससे पहले, राज्य सरकार के कर्मचारियों और राजस्व विभाग के उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद के खिलाफ राज्य में विभिन्न स्थानों पर छापे मारे गए थे। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, एजेंसी ने भानु प्रसाद के परिसरों से 11 बड़े बक्से बरामद किये जिनमें जमीन के दस्तावेज रखे हुए थे। साथ ही, 17 मूल खाते भी बरामद किये थे। ईडी का दावा है कि प्रसाद भूमि रिकॉर्ड और उनके सरकारी स्वामित्व विवरण के कई मूल खातों के संरक्षक थे।