बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेताओं को बुधवार को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा जब यहां आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए उसके एक नेता ने अयोध्या में नवनर्मित राम मंदिर के खिलाफ कथित टिप्पणी की। भागलपुर जिले के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के विधायक गोपाल मंडल ने कथित टिप्पणी यहां पार्टी द्वारा आयोजित 'अति पिछड़ा सम्मेलन' को संबोधित करते हुए की। बता दें कि गोपाल मंडलपहले भी पत्रकारों से मारपीट और ट्रेन में अधोवस्त्र पहनकर घूमने समेत कई मुद्दों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से काफी पहले ही मंच संभाल लिया था।
जदयू विधायक ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह व्यवस्थित नहीं था। इसे अधूरे ढांचे के अंदर आयोजित किया गया और प्रधानमंत्री अपनी पत्नी के बिना पूजा की वेदी पर बैठे थे। गोपाल मंडल द्वारा राम मंदिर के खिलाफ विवादित टिप्पणी किये जाने पर उनके ठीक पीछे खड़े जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने उन्हें टोका और कान में कुछ बताने की कोशिश की लेकिन उनपर असर होता नहीं दिखा। कुशवाहा ने अंतत: मंडल को एक पर्ची दी जिसमें संभवत: उन्हें अपना भाषण संक्षिप्त करने को कहा गया। इसके बाद माइक पर ही मंडल ने कहा कि ठीक है, मैं इसे रहने देता हूं; लेकिन इतना समझाइए मत। हम समझदार हैं। मुझे बोलने से कौन रोक सकता है। हम पांच हजार लोगों को रैली में लाए हैं।
जदयू की रैली में गोपाल मंडल की टिप्पणी राम मंदिर पर जदयू का रुख पार्टी के राष्ट्रीय सलाहकार और प्रवक्ता केसी त्यागी द्वारा स्पष्ट किए जाने के एक दिन बाद आई है। त्यागी ने कहा था कि राम मंदिर का निर्माण उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुसार किया गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे एक राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है, जिसे हम स्वीकार नहीं करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि हम अपने 'इंडिया' गठबंधन के कुछ सहयोगियों द्वारा मंदिर के बारे में की गई नकारात्मक टिप्पणियों का समर्थन नहीं करते हैं। राम सभी के हैं। हमारे विचारक राम मनोहर लोहिया ने देवताओं के बारे में बहुत अच्छी बातें कही हैं। हमें उम्मीद है कि वेटिकन सिटी और मक्का की तरह अयोध्या भी एक अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्थल के रूप में उभरेगा।