नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव टीम
नेपाल में सीपीएन-यूएमएल पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली सोमवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। के समर्थन से प्रधानमंत्री बने। राष्ट्रपति भवन के मुख्य भवन शीतल निवास में शपथ ग्रहण समारोह हुआ। उन्हें कल नई गठबंधन सरकार का चौथी बार देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। केपी शर्मा ओली ने पुष्प कमल दाहाल प्रचंड की जगह ली। बता दें कि ओली के पिछले कार्यकाल में भारत के साथ रिश्तों में काफी तल्खी आई थी। ओली 11 अक्टूबर 2015 से 3 अगस्त 2016 तक नेपाल के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान नेपाल और भारत के साथ संबंध काफी तनावपूर्ण रहे। ओली पांच फरवरी 2018 से 13 मई 2021 तक फिर नेपाल के प्रधानमंत्री बने। बाद में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने उनके पद पर बने रहने को असंवैधानिक कहा था।
दरअसल, केपी शर्मा ओली ने अपने पहले कार्यकाल में भारत पर नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और उनकी सरकार गिराने का आरोप लगाया था। नेपाल ने बॉर्डर एरिया को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया था। उनकी सरकार ने चीन के इशारों पर भारत के कुछ इलाकों को अपने नक्शे में दिखाया, जिसे भारत सरकार ने खारिज कर दिया था। नक्शे में उत्तराखंड में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल का होने का दावा किया गया था। अभी पिछले महीने भी खबर आई थी कि नए नोट पर नेपाल ने भारत के कुछ इलाकों को अपना बताया है। इसके बाद फिर से भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
बता दें कि शुक्रवार देर रात ओली ने नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया था और प्रतिनिधि सभा के 165 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला समर्थन पत्र सौंपा था। इस पर उनकी पार्टी से 77 और नेपाली कांग्रेस से 88 सदस्यों के हस्ताक्षर थे। नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष ओली ने नई गठबंधन सरकार बनाने के लिए एक जुलाई को सात सूत्री समझौते पर आगे बढ़े और हस्ताक्षर किए थे। दोनों नेता इस बात पर सहमत जता चुके हैं कि प्रधानमंत्री का शेष कार्यकाल बारी-बारी से उनके बीच साझा किया जाएगा। बता दें कि नेपाल में 2027 में आम चुनाव होने हैं।