महाकुंभ में हो रहे फेमस अभय सिंह ,जिन्हें 'आईआईटी बाबा' के नाम से भी जाना जाता है, हरियाणा के झज्जर जिले के सासरौली गांव के निवासी हैं। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातक किया और कनाडा में एक विमान निर्माण कंपनी में कार्यरत थे, जहां उन्हें मासिक 3 लाख रुपये का वेतन मिलता था। हालांकि, आध्यात्मिक रुचि के कारण उन्होंने यह सब छोड़कर संन्यास का मार्ग अपनाया।
महाकुंभ 2025 में उनकी उपस्थिति ने उन्हें फेमस बनाया, लेकिन अत्यधिक भीड़ और मीडिया के ध्यान के कारण उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। इससे बचने के लिए उन्होंने महाकुंभ छोड़कर वाराणसी जाने का निर्णय लिया।
उनके गुरु, सोमेश्वर पुरी, ने बताया कि अभय सिंह वाराणसी में जूना अखाड़ा के आश्रम में फक्कड़ अवस्था में पहुंचे थे, जहां उन्होंने उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया।
अभय सिंह के माता-पिता, विशेषकर उनकी मां, उनके संन्यास लेने से दुखी हैं, लेकिन उनके पिता कर्ण सिंह उनके निर्णय का सम्मान करते हैं और उन पर कोई दबाव नहीं डालना चाहते।
अभय सिंह के इस आध्यात्मिक परिवर्तन ने समाज में एक नई चर्चा को जन्म दिया है, जहां एक उच्च शिक्षित व्यक्ति ने भौतिक जीवन छोड़कर आध्यात्मिक पथ को चुना है।