नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव टीम।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार सरकार को उस जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम अवसर दिया, जिसमें बिहार में पिछले कुछ महीने में कई पुल गिरने के बाद राज्य के पुलों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी। प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने वकील ब्रजेश सिंह की जनहित याचिका पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से भी जवाब मांगा। पीठ ने कहा कि बिहार सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया जाता है।
वकील ब्रजेश सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में बिहार में पुलों की खस्ता हालत को दूर करने की मांग की गई है, जो लगातार बुनियादी ढांचे की विफलताओं से त्रस्त राज्य है। यह कानूनी कार्रवाई कई घटनाओं के बाद की गई थी, जिसमें नालंदा जिले में एक दुखद घटना भी शामिल थी, जहां एक 18 वर्षीय लड़के की जीर्ण-शीर्ण पुल के कारण जान चली गई थी। याचिकाकर्ता ने दरभंगा जिले में एक चिंताजनक घटना को भी उजागर किया है, जहां हाल ही में एक निर्माणाधीन पुल ढह गया था, जिसके कारण कथित तौर पर संबंधित कंपनी द्वारा मलबा हटाने की गुप्त गतिविधियाँ की गई थीं।
जनहित याचिका न केवल इन परेशान करने वाले पुल विफलताओं की रिपोर्ट करती है, बल्कि एक व्यापक संरचनात्मक ऑडिट और एक विशेषज्ञ पैनल के गठन पर भी जोर देती है, जो यह मूल्यांकन करेगा कि किन पुलों को सुदृढ़ीकरण या ध्वस्त करने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले, 29 जुलाई को, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क निर्माण विभाग, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड और अन्य सहित विभिन्न अधिकारियों से जवाब मांगा था, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा पर व्यापक चिंता को रेखांकित किया गया था।
सीवान, सारण, मधुबनी, अररिया, पूर्वी चंपारण और किशनगंज जैसे जिलों में बार-बार होने वाली घटनाएं, खासकर मानसून के मौसम में, इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करती हैं। वकील ब्रजेश सिंह केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार पुलों की वास्तविक समय पर निगरानी की वकालत करते हैं, यह देखते हुए कि भारत के सबसे अधिक बाढ़-ग्रस्त राज्य के रूप में बिहार की स्थिति इसके निवासियों के लिए जोखिम को बढ़ाती है।