इंपैक्ट लाइव टीम पटना :-बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने रिटायर्ड असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में कार्रवाई करते हुए उनकी करोड़ों रुपये की संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया है।
रिटायर्ड एआईजी जिनका नाम अभी आधिकारिक तौर पर उजागर नहीं किया गया है, उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सेवा अवधि के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। निगरानी विभाग को मिली शिकायतों और गुप्त जांच के बाद यह पाया गया कि उनकी संपत्ति उनकी वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक है। इस संपत्ति में पटना और अन्य शहरों में कई अचल संपत्तियां (जमीन, मकान, फ्लैट), बैंक खातों में जमा राशि, और अन्य कीमती सामान शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत करोड़ों रुपये में आंकी गई है।
एवियू ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच शुरू की थी। जांच में पाया गया कि रिटायर्ड ने अपनी आय को छुपाने और अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने के लिए कई तरीके अपनाए, जिनमें बेनामी संपत्तियों का उपयोग और फर्जी दस्तावेज शामिल हैं।26 जून को एवियू ने रिटायर्ड एआईजी की संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत उनकी अचल और चल संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। निगरानी विभाग ने संबंधित जिला प्रशासनों और बैंकों को पत्र लिखकर संपत्तियों की पहचान और जब्ती के लिए निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, एआईजी के बैंक खातों को फ्रीज करने और उनके परिवार के सदस्यों की संपत्तियों की भी जांच करने की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई बेनामी संपत्ति छिपाई न गई हो।
एवियू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी दोषी बख्शा न जाए, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो।हालांकि एवियू ने अभी तक संपत्ति की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की हैये संपत्तियां शहर के पॉश इलाकों में स्थित हैं और इनकी कीमत करोड़ों में आंकी गई है। बिहार के विभिन्न जिलों में जमीन के कई टुकड़े, जिनमें कुछ बेनामी लेनदेन के जरिए खरीदे गए।विभिन्न बैंकों में जमा राशि और अन्य वित्तीय निवेश। सोना, गहने, और अन्य महंगे सामान जो उनकी आय के स्रोतों से मेल नहीं खाते।यह कार्रवाई बिहार सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया गया है। हाल के महीनों में निगरानी विभाग ने कई बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिसमें शिक्षा विभाग का घूसकांड और अन्य मामले शामिल हैं। रिटायर्ड एआईजी की संपत्ति जब्ती का मामला यह दर्शाता है कि सरकार उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराने में पीछे नहीं हट रही।