Wednesday 18-Feb-2026

नीतीश कुमार पर रोहिणी का तंज, कहा- चाचा जी की बढ़ती उम्र पर उनके ही चहेते प्यादे के द्वारा उठाया गया सवाल बड़ा भारी है

नीतीश कुमार पर रोहिणी का तंज, कहा- चाचा जी की बढ़ती उम्र पर उनके ही चहेते प्यादे के द्वारा उठाया गया सवाल बड़ा भारी है

पटना, इंपैक्ट लाइव टीम।

बिहार सरकार में ग्रामीण कार्य मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी की ओर से मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई एक कविता से पूरे दिन राजनीतिक खलबली मची रही। कविता की पंक्तियों के राजनीतिक भावार्थ निकाले जाने लगे। अब अशोक चौधरी की कविता को लेकर आरजेडी प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसा है।

बुधवार को रोहिणी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि चाचा जी के यहां सिर - फुटव्वल जारी है , विडंबना तो देखिए, अब तो चाचा जी की ही बढ़ती उम्र पर उनके ही चहेते प्यादे के द्वारा उठाया गया सवाल बड़ा भारी है!! .. कहीं ऐसा तो नहीं कि जुगाड़ की मदद से खड़े किए गए चाचा जी के खेमे के अब बिखरने की बारी है !! .. जारी उठापटक पर चाचा जी की चुप्पी दर्शाती उनकी लाचारी है..

पोस्ट पर काफी प्रतिक्रियाओं के बाद अशोक चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद सफाई के लहजे में शाम के पोस्ट में लिखा- कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। तो, सुनी-सुनाई बातों पर ध्यान देना छोड़ दीजिए। दरअसल, मंगलवार को सियासी चर्चाएं तब शुरू हुईं जब अशोक चौधरी ने एक कविता पोस्ट की, जिसमें लिखा था कि ‘बढ़ती उम्र में इन्हें छोड़ दीजिए।’ एक दो बार समझाने से यदि कोई नहीं समझ रहा है तो सामने वाले को समझाना छोड़ दीजिए। बच्चे बड़े होने पर खुद के निर्णय लेने लगें तो उनके पीछे लगना, छोड़ दीजिए.....।

सियासी चर्चाओं के जोर पकड़ने पर अशोक चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर सफाई दी और करीब घंटेभर की मुलाकात के बाद बाहर निकलने पर कहा कि एक मित्र की पत्नी ने मुझे यह कविता भेजी थी। मुझे अच्छी लगी। इसलिए इसे पोस्ट कर दिया। अशोक चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह कविता किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं है। आज के समय में यह बिल्कुल मौजूं है। पिता-पुत्री और मित्र के संबंध के ऊपर है। यह सामान्य पोस्ट है।

मीडिया के सवाल पर कहा कि इतने बड़े हम मूर्ख या नासमझ नहीं है कि सीएम पर हम तंज कसेंगे, जिन्हें हम मानस पिता मानते हैं। उन्होंने इतना बड़ा सम्मान दिया। आजादी के बाद मैं पहला दलित नेता हूं जो किसी सदन का सदस्य नहीं रहते हुए छह महीने तक मंत्री रहा। कोई राजनीतिक भाव से यह पोस्ट नहीं किया गया है। कुछ लोग इसे घुमाना चाहते हैं। सीएम आवास जाने के सवाल पर कहा कि हम हमेशा जाते हैं। कल भी हम दिनभर मुख्यमंत्री के साथ थे।

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