Saturday 08-Aug-2026

घर एक सपना है, जो कभी ना टूटे; जज नहीं बन सकती सरकार, बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

घर एक सपना है, जो कभी ना टूटे; जज नहीं बन सकती सरकार, बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव टीम।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विभिन्न राज्यों में बुलडोजर एक्शन के खिलाफ दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाया और इसे गलत तरीका बताया है। जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई ने फैसला सुनाते हुए कवि प्रदीप की कविता का हवाला दिया और बताया कि किसी के लिए घर की अहमियत क्या होती है और जब वह टूटता है तो पूरे परिवार पर क्या गुजरती है। उन्होंने कहा कि किसी आरोपी या दोषी का घर गिरा देना पूरे परिवार के लिए सजा है। जस्टिस गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मामले पर सुनवाई की और फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि जो अधिकारी कानून को हाथ में लेते हैं और अनियंत्रित तरीके से काम करते हैं, उनकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

जस्टिस गवई ने कवि प्रदीप की कविता का हवाला देते हुए कहा, 'घर सपना है, जो कभी न टूटे।' सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका की ओर से ऐसी कार्रवाई की अनुमति देना कानून के शासन के खिलाफ है और यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के भी खिलाफ है क्योंकि सजा सुनाने का काम न्यायपालिका का है। जस्टिस गवई ने फैसले में यह भी कहा है कि किसी को दोषी ठहराना सरकार का काम नहीं है और अगर सिर्फ आरोपों पर किसी का घर तोड़ दिया जाता है तो यह कानून के शासन के बुनियादी सिद्धांत पर हमला होगा।

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जस्टिस गवई ने कहा कि सरकार को अधिकार नहीं कि वह जज बन जाए और किसी आरोपी की संपत्ति को गिराने का फैसला सुना दे। उन्होंने कहा कि अगर अचानक से किसी संपत्ति को गिराने के लिए चिन्हित किया जाता है, जबकि उसी तरह की दूसरी संपत्तियों को छुआ तक नहीं जाता तो साफ है कि मकसद गैरकानूनी प्रॉपर्टी गिराना नहीं, बल्कि बिना मुकदमा चलाए ही दंड देने की कार्रवाई है।

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