नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव टीम।
देशभर में डिजिटल अरेस्ट कर लोगों को ठगने के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। ताजा मामला देश की राजधानी दिल्ली का है, जहां शातिर साइबर अपराधियों ने विदेश से फोन कर रिटायर्ड बुजुर्ग इंजीनियर को करीब आठ डिजिटल अरेस्ट कर 10.30 करोड़ रुपये ठग लिए। ठगे जाने का अहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस की साइबर शाखा इफ्सो मामले की जांच में जुटी हुई है। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि बुजुर्ग के पास कंबोडिया से फोन कर आठ घंटे में ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया।
जानकारी के अनुसार ठगों ने बुजुर्ग को निर्देश दिया कि वो खुद को कमरे में बंद कर ले। इसके बाद पीड़ित से बैंक अकाउंट की डिटेल जानकारी मांगी। फिर अलग-अलग करके बुजुर्ग के बैंक खातों से 10.30 करोड़ रुपये बताए गए बैंक खातों में ऑनलाइन जमा करवाया। पीड़ित ने रुपये जमा कर दिए, तब ठगों ने उनके बेटा-बेटी से भी रुपये मंगाने को कहा, जिसके बाद बुजुर्ग को शक हो गया और उन्होंने लैपटाप बंद कर दिया। करीब आठ घंटे डिजिटल अरेस्ट होने के बाद पीड़ित कमरे से बाहर आए। उन्होंने परिजनों को घटना के बारे में बताया तो ठगे जाने का अहसास हुआ। फिर पीड़ित ने एक अक्तूबर को रोहिणी साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दी।
जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को पहले सात अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराया गया। फिर छोटे-छोटे हिस्से में रकम को एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खातों में जमा कराया। इस प्रक्रिया में ठगों ने 15 सौ अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया। इन बैंक खातों में जमा करीब 60 लाख की रकम फ्रीज कराई गई है। इस रकम का कुछ हिस्सा देश के अलग अलग हिस्सों में निकाला गया है।
जानकारी के अनुसार 72 वर्षीय बुजुर्ग अपनी पत्नी के साथ रोहिणी सेक्टर 10 इलाके में रहते हैं। दंपती का बेटा आईआईटी से पढ़ाई करने के बाद दुबई में कारोबार कर रहा है, जबकि बेटी सिंगापुर में रहती है। वहीं, बुजुर्ग 1972 में रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करने के बाद विभिन्न कंपनियों में बड़े पदों पर रहे। सेवानिवृत्ति के बाद से घर पर रहते हैं।
ठगी से बचने के लिए बरतें सावधानी...
डिजिटल अरेस्ट का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में सबसे पहले जरूरी यह है कि जागरूक रहें। किसी की धमकी से डरें नहीं। संदिग्ध आईडी से आए ई-मेल में लिंक पर क्लिक नहीं करें। किसी भी मामले में संलिप्तता बताए जाने पर तुरंत उस एजेंसी से संपर्क करें। कॉलर की बात पर विश्वास नहीं करें। कॉलर द्वारा बताए गए किसी भी ऐप को डाउनलोड नहीं करें साथ ही उनसे अपने बैंक खाते, पैन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य जानकारियां साझा नहीं करें। तुरंत पुलिस को जानकारी दें।
डिजिटल अरेस्ट में किसी शख्स को ऑनलाइन माध्यम से डराया जाता है कि वह सरकारी एजेंसी के माध्यम से अरेस्ट हो गया है, उसे जुर्माना देना होगा। डिजिटल अरेस्ट एक ऐसा शब्द है जो कानून में नहीं है।