अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निषेध दिवस के अवसर पर हितैषी हैप्पीनेस होम, नशा मुक्ति एवं मानसिक आरोग्य संस्था में एक सेमिनार और जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। आज हितैषी हैप्पीनेस होम के 17 वर्ष पूरे होने पर स्थापना दिवस भी मनाया गया। इस मौके पर समारोह की मुख्य अतिथि क्लीनिकल साईकोलाजिस्ट डॉ बिंदा सिंह ने कहा कि इसके प्रति कड़ा कानून व्यवस्था लागू करने और उचित तरीके से स्वास्थ्य के प्रति सहयोग देने की जरुरत है। बच्चों का स्कूल में ड्रग टेस्ट अनिवार्य हो। उन्होंने हितैषी के 17 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी और इसी तरीके से समाज सेवा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में नशा का सेवन कम है, फिर भी यह तेजी से फैल रहा है। इसके रोकथाम के लिए प्रयास होना चाहिये।
हितैषी हैप्पीनेस होम के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ विवेक विशाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय द्वारा वर्ष 2024 के लिए चुना गया विषय हैः “साक्ष्य स्पष्ट हैः रोकथाम में निवेश करें।”नशे का व्यापार आर्म्स के व्यापार के बाद इसका सबसे बड़ा कारोबार है। आज नशे को लोग फैशन और प्रचलन के रूप में ले रहे हैं। कई तरह के मानसिक और शारीरिक बीमारी के शिकार हो रहे हैं। आने वाले समय में यह इतना विकराल रूप ले लेगा कि स्वस्थ मनुष्य के रूप में लोगों को पहचान पाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बाद अन्य प्रकार का नशा जैसे स्मैक, गांजा, भांग, गुल, इंजेक्शन, कोकेन, आयोडेक्स, पेट्रोल, डीजल और नशीली दवाइयों का प्रचलन बढ़ रहा है। यदि सही तरीके से इलाज हो तो, नशा से मुक्ति मिल सकती है।लोगों को जागरूक करने की बहुत आवश्यकता है ।खासकर इसमें मीडिया का रोल बहुत महत्वपूर्ण है ।स्कूल ,कॉलेज और विभिन्न संस्थाओं में जागरूकता अभियान भी बहुत जरूरी है।
कोइलवर मानसिक अस्पताल के पूर्व सुपरिटेंडेंट और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ केपी शर्मा ने कहा कि नशा समाज की नींद को खोखला कर रहा है, उन्होंने बताया कि 1.4 मिलियन बच्चों की मृत्यु जो कि 10-14 वर्ष के हैं, उसका कारण शराब और अन्य नशीले पदार्थ होते हैं। उनमें एचआइवी एडस होने की संभावना भी अधिक होती है। डॉ० बिंदा सिंह ने कहा कि नशा से व्यवहारिक और परिवारिक जीवन बिखर रहा है। नशे के मामले में महिलाएं भी पीछे नहीं है। महिलाओं द्वारा ही मादक पदार्थ का बहुत अधिक मात्रा में सेवन किया जाता है। व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में तनाव, प्रेम संबंध, व तलाक आदि महिलाओं में नशे की बढ़ती लत के लिए जिम्मेदार हैं। इसके लिए काउंसलिंग और उचित उपचार जरूरी है। जिससे गलतियों को दूर कर नई सोच समझ को विकसित किया जा सके।
इस अवसर पर हितैषी हैप्पीनेस होम की निदेशक सुमीता शर्मा ने कहा कि पारिवारिक माहौल का अच्छा होना,अभिभावक का अपने बच्चों से खुलकर बात करना बहुत जरूरी है ।हितैषी हैप्पीनेस होम के द्वारा राज्य स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा जिसमें प्रशासन और मीडिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। वहीं मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ राकेश कुमार ने बताया कि नशीले पदार्थ का सेवन से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने उद्येश्य से इसे मनाया जाता है। नशा एक ऐसी बीमारी है जो की युवा पीढ़ी को अपनी चपेट में लेकर उसे कई तरह से बीमार कर रही है।
इसके अलावा मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ शिवम सुनील ने कहा कि भारत में 25 करोड़ से अधिक लोग सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, गुटका, पान मसाला किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। पूरे विश्व में धूम्रपान करने वाले लोगों की 12 प्रतिशत आबादी भारत में है, तंबाकू से संबंधित बीमारियों से लगभग 50 लाख लोग प्रतिवर्ष मारे जाते है। जिनमें करीब डेढ़ लाख महिलाएं हैं। उन्होंने बताया की आज 7.5 प्रतिशत लोग मानसिक बीमारी से ग्रसित और 15 प्रतिशत लोग न्यूरोलॉजिकल बीमारी से ग्रसित है, जिसका कारण नशा का दुरुपयोग है, और मादक पदार्थ के सेवन से मस्तिष्क के महत्वपूर्ण अंग एवं न्यूरोट्रांसमीटर डोपालिन एवं सेरोथेनिन पर गहरा असर पड़ता है।
डॉ० अमृता मिश्रा ने बताया कि युवा बच्चे और महिलाएं सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से गुल, स्मैक, ब्राउन शुगर, गांजा, भांग, सिगरेट, इंजेक्शन एवं अवैधा नशीली दवाइयों का दुरुपयोग कर रहे है, जिसकी वजह से महिलाओं में अवसाद 47, चिंता संबंधी बीमारी 55, दर्द संबंधी बीमारी 23, अनिद्रा 47 प्रतिशत हो रही है। हितैषी हैप्पीनेस होम की सीनियर मनोवैज्ञानिक डॉ० प्रतिभा सिंह ने इसके उपचार एवं बचाव के संबंध में बताया कि आज लोगों को मनोवैज्ञानिक एवं संवेगात्मक रूप से मजबूत बनाना जरूरी है।
मनोवैज्ञानिक कामिनी कुमारी ने छात्रों में बढ़ती नशे के संबंध में स्पष्ट किया कि आज 8 क्लास के 61 प्रतिषत बच्चे और 12 क्लास के 62 फीसदी छात्र अल्कोहल के अलावा गुल, व्हाइटनर, थिनर, ब्राउन शुगर, गांजा आदि का दुरुपयोग कर रहे हैं और उन्हें ग्लानि भी नहीं होती है। इस अवसर पर यहाँ पर भर्ती लोगों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया ।
जागरुकता कार्यक्रम में डॉ ब्रिज भूषण ,डॉ माधवेन्द्र सिन्हा ,मनोवैज्ञानिक नुसरत बानो, आराधना, पूजा, नीरू, भी इसमें षामिल हुए। इस अवसर पर हितैषी में नशे से पीड़ित लोगों के लिए मुफ्त काउंसलिंग की व्यवस्था भी की गई द्यडॉ बिंदा सिंह ,डॉ अमृता मिश्रा ,डॉ प्रतिभा सिंह ,कामिनी कुमारी ,नीरू कुमारी ,आराधना कुमारी और गुड़िया कुमारी ने 5 लोगों की काउंसलिंग की। इस अवसर पर ये भी निर्णय लिया गया कि स्कूल ,ऑफिस ,और विभिन्न संस्थाओं में नशे की रोकथाम के लिए कैम्प भी लगाये जाएँगें । अंत में हितैषी हैप्पीनेस होम की कार्यकारी निदेशक सुमीता शर्मा ने सबों का धन्यवाद ज्ञापन किया।