पटना इंपैक्ट लाइव टीम
किसी भी महिला के लिए मां बनना सबसे सुखद एहसास कहा जाता है। लेकिन कई बार इसमें बाधा आ जाती है। ऐसी ही एक बाधा फतुहा की 32 वर्षीय महिला को आ गई। शादी के सात बाद तक वो मां नहीं बन पाई। फतुहा से लेकर पटना के कई डॉक्टरों व अस्पतालों के उसने खाक छाने। लेकिन कोई मां बनाने में सहयोगी नहीं बन पाया। मर्ज पकड़ में आ गया था बावजूद उसको ठीक नहीं कर पाया। अंतत: वो एनएमसीएच की प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलू प्रसाद के यहां पहुंची। यहां सर्जरी और इलाज के बाद अंतत: वो मां बनी और वो भी जुड़वे बच्चे की।
डॉ. नीलू प्रसाद ने इस केस के बारे में बात करते हुए बताई कि यह केस काफी जटिल था। मैंने इसके कई जांच किए। अल्ट्रांसाउंड किया, जिसमें दोनों फेलोपियन ट्यूब का आकार वृहद दिख रहा था। उसमें पानी भरा हुआ था। फिर सीटी स्कैन और एमआरआई कराया। इससे मर्ज सूक्ष्मता से समझने में सहूलियत मिली। फिर मैंने दूरबीन विधि से फेलोपियन ट्यूब निकालने की कोशिश की। लेकिन सफलता नहीं मिली। ऐसे में अब ओपन सर्जरी ही एक विकल्प रह गया था। मैंने जटिलता के बारे में मरीज और उसके अभिभावक बताया। वो लोग ओपन सर्जरी के लिए तैयार हो गए। क्योंकि जब खराब फेलोपियन ट्यूब नहीं निकलता मरीज का गर्भ नहीं ठहरना संभव नहीं था।
उन्होंने आगे बताया कि ये ट्यूब 13/10 सेंटीमीटर का हो चुका था। ऐसे सहमति से मैंने अपनी के साथ आस्थालोक हॉस्पिटल में ओपन सर्जरी से कर ट्यूब को हटाया। करीब डेढ़ घंटा इस सर्जरी में लगा। घाव सूखने के बाद आईवीएफ के जरिए विशेष तकनीक से गर्भधारण की प्रक्रिया शुरू की गयी। पहली बार में ही महिला कंसीव कर गई और उन्हें जुड़वां बच्चा ठहर गया। महिला से जुड़वां बच्चे को सफलतापूर्वक जन्म दिया। इनमें एक लड़का और एक लड़की है। दोनों शिशु बिल्कुल स्वस्थ्य जन्म लिए। उनमें सभी स्वाभाविक गुण सामान्य रूप से थे। अब जच्चा-बच्चा सभी स्वस्थ्य हैं। महिला के पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।