Saturday 13-Jun-2026

शिक्षा विभाग से हटाए गए केके पाठक, नीतीश सरकार ने लिया बड़ा फैसला

शिक्षा विभाग से हटाए गए केके पाठक, नीतीश सरकार ने लिया बड़ा फैसला

बिहार के शिक्षा विभाग से अंततः केके पाठक की विदाई हो गयी है। वैसे इसकी अटकलें तो काफी पहले से लगाई जा रही थी, जिस पर अब नीतीश सरकार ने अपनी मुहर लगा दी है यानि कि अब सरकारी स्कूलों में केके पाठक के औचक निरीक्षण पर पहुँचने से मचे हड़कंप की खबरें नहीं आएगी। अब न ही केके पाठक का शिक्षकों पर बड़ा एक्शन ब्रेकिंग न्यूज़ बनेगा. या यूं कहें कि हो सकता है अब शिक्षा विभाग ही ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं बने। देखें तो केके पाठक के आने से पहले भी शिक्षा विभाग में कई अपर मुख्य सचिव आये और कई आगे भी आयेंगे, लेकिन केके पाठक ने जिस तरह से कड़े और बड़े फैसले लिए, इसकी चर्चा लंबे समय तक होते रहेगी. ऐसे में आइये केके पाठक पर एक रिपोर्ट देखते हैं।

बता दें कि बिहार में शिक्षा विभाग बीते एक वर्षों से लगातार सुर्ख़ियों में है। खासकर केके पाठक के अपर मुख्य सचिव बनने के बाद से शायद ही ऐसा कोई दिन गया हो जिस दिन मीडिया में शिक्षा विभाग का जिक्र नहीं हुआ हो। इस बीच कई ऐसे मौके आये जब केके पाठक सत्ताधरी दलों और विपक्ष के रडार पर आये, लेकिन नीतीश कुमार ज्यादातर केके पाठक का पक्ष लेते दिखे। हालांकि शिक्षा विभाग और राजभवन के बीच तकरार, स्कूलों की टाइमिंग, त्योहारों पर छुट्टी जैसे कई मामले ऐसे भी रहे, जहां सरकार के लिए भी मुश्किलें खड़ी हुई, जिस पर नीतीश कुमार कई बार सख्त फैसले भी लेते नजर आये, लेकिन इन सके बाद भी केके पाठक की कुर्सी सलामत रही। ऐसे में केके पाठक के छुट्टी पर रहने के दौरान ही नीतीश कुमार द्वारा उनका शिक्षा विभाग से ट्रांसफर करना, लोगों को भी चौंका रहा है।

अगर ताजा मुद्दे की बात करें तो इस वक्त गर्मी की छुट्टी और स्कूल खोलने के समय को लेकर केके पाठक विरोधियों के रडार पर थे। पर एक सच्चाई यह भी है कि केके पाठक को लेकर ऐसा पहली बार नहीं हुआ कि विरोधी उन्हें हटाने की मांग कर रहे हो। तो अभी ही नीतीश कुमार ने एक्शन क्यों किया? क्या इसका लोकसभा और विधानसभा चुनाव से संबंध है?

दरअसल लोकसभा चुनावों में बिहार में NDA को पिछली बार की तुलना में 9 सीटों का नुकसान हुआ। चुनावों में बीजेपी को 5 तो JDU को 4 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा....जबकि बिहार में शिक्षकों की बड़ी बहाली भी हुई थी। फिर भी NDA को लाभ के जगह नुकसान हुआ। गौरतलब है कि चुनावों के समय भी केके पाठक शिक्षकों के निशाने पर थे। तो क्या शिक्षकों की नाराजगी से NDA को नुकसान हुआ...यह बड़ा सवाल है. ऐसे में हो सकता है कि नीतीश कुमार विधानसभा चुनावों से पहले अब इसकी भरपाई करने की कोशिश में हों।

देखें तो नये अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ की मौजूदगी में शिक्षा विभाग और राजभवन के बीच रिश्ते सामान्य होते दिख रहे हैं। वहीं शिक्षकों की भी नाराजगी दूर होती दिख रही है। एस सिद्धार्थ के राज में शिक्षा विभाग ने न सिर्फ केके पाठक के विपरीत स्कूलों के टाइमिंग में बदलाव किया बल्कि अब तो शिक्षकों को नाश्ते के लिए भी 20 मिनट का ब्रेक देने का निर्देश दे दिया है। यानि कि एस सिद्धार्थ कहीं न कहीं शिक्षकों के लिए राहत लेकर आये हैं। वैसे जिन्हें केके पाठक का काम करने का तरीका पसंद है, वे तो यही उम्मीद करेंगे कि बिहार के सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई की उन्होंने जो मुहीम छेड़ी थी, वह यूं ही कायम रहे। हालांकि केके पाठक के कंधों पर अभी भी बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। जिस तरह का इनका नेचर है, ऐसे में इस विभाग में भी आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वैसे केके पाठक के हटने के बाद बिहार में शिक्षा विभाग में आगे क्या बदलाव होता है यह देखना दिलचस्प होगा।