डॉक्टर्स डे के अवसर पर देश की राजधानी नई दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें चिकित्सा क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में मेडिवर्सल हेल्थकेयर के सह-संस्थापक और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. नलिनी रंजन सिंह और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ एवं सलाहकार डॉ. विकास सिंह को भी सम्मानित किया गया।
इस मौके पर डॉ. विकास सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में उपस्थित अन्य प्रतिष्ठित डॉक्टरों में डॉ. (पद्मश्री) रणदीप गुलेरिया - पूर्व निदेशक, एम्स - नई दिल्ली, डॉ. (पद्मश्री) बलराम भार्गव - तत्कालीन महानिदेशक, आईसीएमआर, डॉ. (पद्मश्री) डी एस राणा, चेयरमैन - सर गंगा राम अस्पताल, डॉ. (पद्मभूषण) अशोक सेठ, चेयरमैन - फोर्टिस एस्कॉर्ट्स और डॉ. (पद्मश्री) जीवन एस तितलियाल, प्रमुख - आरपी सेंटर, एम्स शामिल थे और इन हस्तियों के बीच उन्हें सम्मानित किया जाना सच में एक बड़ी बात है।
वहीं डॉ. नलिनी रंजन सिंह ने बताया कि उन्हें दक्षिण भारत की फिल्म अभिनेत्री सह भारत की सुप्रसिद्ध भरत नाट्यम नृत्यांगना सुधा चंद्रन को सम्मानित करने के लिए चुना गया। सुधा चंद्रन को इसलिए चुना गया क्योंकि वह 15 साल की आयु में बस दुर्घटना में, उनका दाहिना पैर, घुटना से नीचे काट दिया गया और हड्डी के डॉक्टरों के अथक प्रयास और नकली पैर के सहारे कठिन तपस्या के बाद विश्व की प्रथम दिव्यांग महिला नर्तकी और अभिनेत्री बन पाई, इसके लिए वो ऑर्थोपैडिक डॉक्टरों को ख़ासा सम्मान और आभार व्यक्त करती हैं।
भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना के चिकित्सा सेवाओं के महानिदेशक - लेफ्टिनेंट जनरल अरिंदम चटर्जी, एयर मार्शल राजेश वैद्य और सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन ने अपने प्रेरणादायक शब्दों से सभी को गौरव और आत्मविश्वास से भर दिया। राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अभिजात सेठ और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के चेयरमैन डॉ. बी एन गंगाधर ने भी अपना राय और विचार साझा किया और विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा की। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी अपनी उपस्थिति से समारोह की शोभा बढ़ाई।
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने अपने जीवन और सपनों को पूरा करने के बाद कैसे प्रेरित रह सकते हैं, इस पर विस्तृत चर्चा की। प्रसिद्ध भरतनाट्यम नर्तकी और अभिनेत्री सुधा चंद्रन ने जीवन में आने वाली चुनौतियों को पार करने के बारे में अपनी प्रेरणादायक कहानी साझा की। निचले अंग की विच्छेदन भी उन्हें अपने नृत्य और प्रदर्शन के सपनों को पूरा करने से नहीं रोक सकी। उनके हाथों से 'इंस्पायरिंग कार्डियो-मेटाबोलिक ऑफ इंडिया' का पुरस्कार प्राप्त करना एक अत्यंत सम्मान की बात थी। पद्मश्री पुरस्कार विजेता और प्रख्यात भारतीय पैरा तैराक सत्येंद्र सिंह लोहिया ने अपनी कहानी साझा की कि कैसे उन्होंने अपनी विकलांगता को अपने संकल्प को प्रभावित नहीं करने दिया और हर वह सपना पूरा किया जिसकी कोई भी कल्पना कर सकता है।