कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार लोकसभा चुनाव मैदान में नहीं उतरेंगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा है कि 2024 का आम चुनाव मैंने नहीं लड़ने का निर्णय लिया है। लेकिन, मैं अपने देश के लोगों, विशेष कर गरीब, वंचित वर्ग और महिलाओं की सेवा हमेशा करती रहूंगी।
बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार ने सासाराम सुरक्षित सीट का 2004 से 2014 तक दो बार प्रतिनिधित्व किया था। 2009 से 2014 तक लोकसभा अध्यक्ष रहीं। हालांकि 2014 और 2019 के चुनाव में वे भाजपा के छेदी पासवान से हार गई थीं। मीरा कुमार विदेश सेवा की नौकरी छोड़ राजनीति में आई थीं। वे पहली बार 1985 में बिजनौर से सांसद बनी थीं। इसके बाद 1996 में दूसरी बार सांसद बनीं।
इस बार लोकसभा चुनाव में मीरा कुमार को कांग्रेस से प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन, मीरा कुमार ने शनिवार को खुद ही स्थिति स्पष्ट कर दी कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगी। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के छेदी पासवान ने उन्हें करीब 1.65 लाख मतों के अंतर से पराजित किया था। इसके पहले 1989 व 1991 में जनता दल से छेदी पासवान व कांग्रेस की मीरा कुमार के बीच चुनावी जंग हुई थी, जिसमें मीरा कुमार चुनाव हार गई थीं। वर्ष 1996 व 1998 में भाजपा के मुनि लाल व छेदी पासवान के बीच लड़ाई हुई थी, जिसमें मुनिलाल ने जीत का परचम लहराया था।
वर्ष 2004 व 2009 में हुए चुनाव में मीरा कुमार ने जीत दर्ज कराई। फिर 2014 व 2019 में कांग्रेस से मीरा कुमार व भाजपा से छेदी पासवान के बीच हुई चुनावी जंग में छेदी पासवान ने बाजी मार ली। सासाराम लोकसभा क्षेत्र में वर्ष 1977 से लेकर 1999 और बाद में वर्ष 2014 व 2019 के चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। जबकि वर्ष 1952 से 1971 तक जगजीवन राम तथा वर्ष 2004 से 2009 तक उनकी बिटिया मीरा कुमार कांग्रेस से चुनाव जीती हैं।