Saturday 13-Jun-2026

बाप रे बाप... 4 करोड़ से भी अधिक कैश देख पुलिस हुई हैरान, क्या है पूरा मामला? जानिए

बाप रे बाप... 4 करोड़ से भी अधिक कैश देख पुलिस हुई हैरान, क्या है पूरा मामला? जानिए

कटिहार, इंपैक्ट लाइव टीम।

बिहार के कटिहार में पुलिस ने सीमांचल के किसानों से मक्का के नाम पर करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने ठगी के आरोपी को चार करोड़ आठ लाख, 94 हजार 450 रुपये के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पोठिया थाना क्षेत्र के डुम्मर निवासी गौतम कुमार चौधरी है। एसपी जितेंद्र कुमार ने बताया कि पोठिया थाना क्षेत्र के शब्दा निवासी हिमांशु भगत व अन्य किसानों और व्यापारियों ने जनवरी 2024 में थाने में शिकायत की थी कि उन लोगों ने प्रीतम ट्रेडर्स डुम्मर को मक्का बेचा गया था। इसके मालिक गौतम चौधरी ने मक्के की कीमत के तौर पर पांच करोड़ रुपये दिये। लेकिन शेष करोड़ों रुपये गबन कर फरार हो गया। शुक्रवार को गौतम को पोठिया से गिरफ्तार कर उसके मकान के गोदाम में रखे 4 करोड़ बरामद किये गए हैं।

एसपी ने बताया कि जांच के क्रम में पता चला कि गौतम के पास काफी पैसा है। वह देश के विभिन्न राज्यों के फाइव स्टार होटलों में पुलिस से बचने के लिए रह रहा है। इसके पीछे वह आवागमन में न केवल राजधानी बल्कि हवाई जहाज का भी इस्तेमाल करता है। गौतम कुमार चौधरी के खिलाफ पूर्व में भी कई गबन समेत कई अपराधिक मामले दर्ज हैं। अररिया में बैंक का चेक बाउंस का केस दर्ज है। डेढ़ माह से आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस रेकी कर आरोपी को पैसों का जखीरा के साथ गिरफ्तार किया गया है। इससे सैकड़ों के किसान और लघु व्यवसायी मानसिक प्रताड़ना के शिकार हो चुके थे। कई बार किसान व लघु व्यवसायी एसपी से न्याय की गुहार लगायी थी। कई किसानों और व्यापारियों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गया था।

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कैसे करता था किसानों से रुपये की ठगी
एसपी ने बताया कि गौतम अपने भांजे के अलावा अन्य लोगों के साथ मिलकर पहले पता लगाता था कि किस किसानों के पास मक्का है और बेचने वाला है। किसानों से 100 क्विंटल से लेकर 500 क्विंटल मक्का बेचने वाले किसानों से अनाज लेकर पांच से सात दिन बाद पैसे देने की बात कहता था। एसपी ने बताया कि मक्का लेकर हरियाणा में बेच देता था। एसपी ने बताया कि किसानों को 22 रुपये प्रति किलो मक्का बेचने के बात पर खरीदने की बात करता था। मगर हरियाणा में वह 20 से 18 रुपये यानि कम दर पर मकई बेचकर प्राप्त रुपये को मक्का किसान और व्यवसायी को नहीं देता था।