सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर बिहार सरकार को पुलों का संरचनात्मक ऑडिट कराने तथा एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है ताकि उन पुलों की पहचान की जा सके जिन्हें या तो मजबूत किया जा सकता है या जिन्हें गिराया जाना चाहिए। बता दें कि बिहार के सीवान, सारण, मधुबनी, अररिया, पूर्वी चंपारण और किशनगंज जिलों में पिछले एक पखवाड़े में पुल ढहने की बारह घटनाएं सामने आई हैं। लोगों का दावा है कि भारी बारिश की वजह से ये हादसे हुए हैं।
बिहार में पुल हादसों को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला है। लालू ने एक्स पर लिखा है कि नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार इसका दोष भी मुगलों, अंग्रेजों और विपक्षियों को ही देंगे। कल एक ही दिन में 5 पुल ढहे। 15 दिन में 12 पुल गिर चुके हैं। पुलियों का कोई हिसाब-किताब नहीं। वहीं दूसरी ओर पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने भी एक्स पर लिखा है कि 4 जुलाई यानि आज सुबह बिहार में एक पुल और गिरा। कल 3 जुलाई को ही अकेले 5 पुल गिरे। 18 जून से लेकर अभी तक 12 पुल ध्वस्त हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन उपलब्धियों पर एकदम खामोश एवं निरुत्तर है। सोच रहे हैं कि इस मंगलकारी भ्रष्टाचार को जंगलराज में कैसे परिवर्तित करें?
गौरतलब है कि 3 जुलाई को सीवान के महाराजगंज और छपरा से पुल गिरने की खबर सामने आई थी। छपरा के लहलादपुर प्रखंड के जनता बाजार ढोढ़नाथ मंदिर के पास नदी पर बना पुल ध्वस्त हो गया। वहीं सीवान में एक पुलिया महराजगंज की देवरिया पंचायत में ध्वस्त हुआ है, जो धमही नदी पर बना था। दूसरा पुलिया महाराजगंज प्रखंड के नौतन सिकंदरपुर गांव के समीप ध्वस्त हुआ है। यह गंडकी नदी पर बना था।