Friday 05-Dec-2025

Lung cancer से बचने के लिए जागरूकता है जरूरी, डॉक्टर की सलाह

Lung cancer से बचने के लिए जागरूकता है जरूरी, डॉक्टर की सलाह

पटना, इंपैक्ट लाइव टीम।

राजधानी पटना के नारायणा कैंसर सेंटर की ओर से बुधवार को विश्व लंग्स कैंसर जागरूकता माह के अंतर्गत एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें लंग्स कैंसर के प्रमुख लक्षण, बचाव और निदान के बारे में विस्तार से बताया गया। इस अवसर पर नारायणा कैंसर सेंटर के मेडिकल ऑंकोलॉजिस्ट डॉ.अभिषेक आनंद ने बताया कि हर साल नवंबर महीने को लंग्स कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को लंग्स कैंसर के प्रति जागरूक करना है।

भारत में बढ़ गए हैं लंग्स कैंसर के मामले
भारत में फेफड़ों के कैंसर के केस बढ़ गए हैं। सभी प्रकार के कैंसरों में 5.9% लोग लंग्स कैंसर से ग्रसित हैं जबकि 8.1% लोगों की इससे मौत हो रही है। डॉ. अभिषेक आनंद ने बताया कि फेफड़ों में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण लंग्स कैंसर होता है। कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन की वजह से कैंसर कोशिकाएं ट्यूमर बना सकती हैं।

शुरुआती लक्षण का नहीं चलता पता
उन्होंने बताया कि लंग्स कैंसर का पता शुरुआत में नहीं चल पाता है। कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिनपर ध्यान देना जरूरी है। लंग्स और उसके आस-पास होने वाले कैंसर के कारण लंबे समय तक खांसी होती रह सकती है। इसके अलावा खांसी के साथ खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट जैसी समस्याएं हैं, जो इसका संकेत हैं। इसके साथ ही हड्डी में दर्द, बिना वजह ही वजन का कम होना, भूख ना लगना, चेहरे-गर्दन में सूजन की अगर दिक्कत हो तो सावधान हो जाएं।

धूम्रपान सबसे बड़ा खतरा
धूम्रपान करने वाले लोगों में लंग्स कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा होता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि फेफड़ों के कैंसर से होने वाली 80% मौतें धूम्रपान से संबंधित हैं। इसके अलावा अगर आप धूम्रपान नहीं भी करते हैं पर सेकेंडहैंड स्मोकिंग के शिकार हैं तो भी अपमें फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। बता दें कि तम्बाकू उत्पादों के जलने से उत्पन्न धुएं के संपर्क में आने को सेकेंडहैंड स्मोकिंग कहा जाता है। इसके अलावा वायु प्रदूषण, रसायनों के अधिक संपर्क में रहना भी आपके लिए खतरनाक हो सकता है।

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