Tuesday 14-Apr-2026

अजमल कसाब को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया था, यासीन मलिक केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान

अजमल कसाब को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया था, यासीन मलिक केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान

नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव टीम।

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू की अदालत के कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक से शारीरिक रूप से जिरह करने के लिए जेल में एक अदालत स्थापित करने का सुझाव देते हुए गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से इस संबंध में विकल्प तलाशने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह निर्देश देते कहा कि हमारे देश में अजमल कसाब को भी निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया गया था...उच्च न्यायालय में उसका पक्ष रखने के लिए वकील नियुक्त किया गया था।

जम्मू की एक अदालत ने चार भारतीय वायुसेना कर्मियों की हत्या और 1989 में मुफ्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से जुड़े गवाहों की जिरह के लिए मलिक की पेशी का आदेश दिया था। मलिक आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद दिल्ली की तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। सीबीआई ने मलिक को जम्मू-कश्मीर ले जाने के आदेश का विरोध करते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

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सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के समक्ष दलील देते हुए कहा कि मलिक अक्सर पाकिस्तान की यात्रा करता रहा है। वह हाफिज सईद के साथ मंच साझा करता रहा है। मेहता ने शीर्ष अदालत से कहा कि वह (मलिक) सिर्फ एक आतंकवादी नहीं है और ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार नहीं चल सकता। मलिक ने मामले में गवाहों से जिरह करने के लिए शारीरिक रूप से उपस्थित होने की अनुमति की गुहार लगाई। शीर्ष अदालत ने कहा कि कोई भी व्यक्ति वीडियो कॉन्फ्रेंस पर जिरह नहीं करता है। मेहता ने दलील देते हुए कहा कि अदालत ने कहा था कि इस मामले में मलिक को शारीरिक रूप से पेश होने की अनुमति देना उचित नहीं है।

पीठ ने कनेक्टिविटी के मुद्दे का हवाला दिया। सॉलिसिटर जनरल ने अपनी ओर से स्पष्ट किया कि कनेक्टिविटी है। उन्होंने कहा कि अगर वह इस बात पर अड़े रहते हैं कि वह व्यक्तिगत रूप से जिरह करना चाहते हैं तो मुकदमे को स्थानांतरित किया जा सकता। पीठ के समक्ष मेहता ने मलिक और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी हाफिज सईद की मंच साझा करते हुए एक तस्वीर दिखाई। पीठ ने मेहता से पूछा कि आप कैसे कह सकते हैं कि अगर कोई पक्ष या आरोपी, जो व्यक्तिगत रूप से पेश हो रहा है, जिरह करना चाहता है, तो उसे इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी? मेहता ने कहा कि यह उनकी चाल थी। हम अदालत के समक्ष कुछ उपाय भी उपलब्ध करा सकते हैं। पीठ ने उनसे कहा कि वे इस बात पर निर्देश लें कि मुकदमे में कितने गवाह हैं। मेहता ने पीठ से आग्रह किया कि वह मलिक और सईद की पाकिस्तान में एक साथ तस्वीर देखें। उन्होंने दावा किया कि मलिक पाकिस्तान की यात्रा करते थे। शीर्ष अदालत इस मामले में अगली सुनवाई 28 नवंबर को करेगी।

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