पटना, इंपैक्ट लाइव टीम।
लोक गायिका शारदा सिन्हा का मंगलवार की शाम दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। उनके जाने से देशभर में शोक की लहर है। वे जब से बीमार हुईं तब से उनकी तबीयत को लेकर राजनीतिक चेहरों ने हालचाल जानने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद शारदा सिन्हा के बेटे अंशुकान सिन्हा को फोन कर उनका हाल चाल जाना था। वे कलाकार होने के चलते राजनीतिक लोगों के करीब थीं। कयास लगने लगा था कि क्या शारदा सिन्हा कभी राजनीति में आना चाहती थीं?
एक हिंदी न्यूज चैनल के साथ बातचीत के दौरान शारदा सिन्हा ने कहा था कि राजनीति एक जमाने में अच्छी चीज थी लेकिन अब मैली हो गई है। विधान परिषद या राज्यसभा में नॉमिनेट किया जाता है। दूसरे राज्यों में कलाकारों को नॉमिनेट किया गया है। लता मंगेशकर जी और रेखा जी भी नॉमिनेट होकर गईं। बिहार सरकार की तरफ से कोई कोशिश नहीं की गई कि कलाकारों की आवाज पहुंचा सकें।
राजनीति से भले शारदा सिन्हा दूर रही हों लेकिन वे चिराग पासवान और तेजस्वी यादव में भविष्य देखती थीं। उन्होंने कहा था कि अगर बेहतर काम करें तो चिराग पासवान हों या तेजस्वी यादव बिहार को बखूबी संभाल सकते हैं। बड़े से सही अनुभव और अपनी दूरदर्शिता रखें तो बिल्कुल कर सकते हैं। युवाओं में ताकत होती है।
चुनाव लड़ने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था नहीं। उन्होंने कहा था कि कलाकार होने के नाते उसी में रहने की कोशिश रही है। इन दिनों जिस तरह से चुनाव होने लगे हैं, तरीका बदल गया है। जबरदस्ती का चुनाव हो गया है। गौरतलब है कि शारदा सिन्हा चुनाव आयोग की ब्रांड एंबेसडर रही थीं।