Tuesday 21-Apr-2026

पूरी गरिमा, मर्यादा से सहमति या असहमति जतायें सांसद : ओम बिरला

पूरी गरिमा, मर्यादा से सहमति या असहमति जतायें सांसद : ओम बिरला

नई दिल्ली, इंपैक्ट लाइव टीम।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर सभी निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को आज नसीहत दी कि जिस प्रकार से संविधान सभा में अलग-अलग विचार धारा वाले विद्वानों ने एक-एक अनुच्छेद पर विचार मंथन करके पूरी गरिमा एवं मर्यादा से सहमति या असहमति व्यक्त की, हमें भी उसी परंपरा को सदनों में अपनाना चाहिए।

ओम बिरला ने संविधान सदन के केन्द्रीय कक्ष में आयोजित ऐतिहासिक संविधान दिवस कार्यक्रम में अपने स्वागत संबोधन में यह बात कही। उन्होंने संविधान दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेतागण और सांसदों का अभिनंदन करते हुए कहा कि आज संविधान दिवस का उत्सव मना रहे करोड़ों भारतीयों का मैं हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करता हूँ। 75 वर्ष पहले आज ही के दिन इस पवित्र स्थान पर हमारे संविधान को अंगीकृत किया गया था। राष्ट्रपति महोदया के नेतृत्व में सम्पूर्ण देश एक साथ मिलकर आज संविधान के प्रति कृतज्ञता प्रकट कर रहा है। आज करोड़ों देशवासी संविधान की प्रस्तावना का पाठ करके देश को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगे।

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लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रेरणा से वर्ष 2015 में हमने हर वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। हमारा संविधान हमारे मनीषियों के वर्षों के तप, त्याग, विद्वता, सामर्थ्य और क्षमता का परिणाम है। इसी केन्द्रीय कक्ष में लगभग 3 वर्षों के कठिन परिश्रम के बाद उन्होंने देश की भौगोलिक और सामाजिक विविधताओं को एक सूत्र में बांधने वाला संविधान बनाया। उन्होंने कहा कि संविधान सभा में अलग अलग विचारधारा वाले सदस्य थे। इसके बावजूद उन्होंने एक-एक अनुच्छेद पर विचार मंथन किया, पूरी गरिमा और मर्यादा से अपनी सहमति असहमति व्यक्त करते हुए हमारे संविधान की रचना की। सार्थक एवं गरिमापूर्ण संवाद की इसी उत्कृष्ट परंपरा को हमें अपने सदनों में अपनाना चाहिए।

ओम बिरला ने कहा कि हमारा संविधान देश में सामाजिक-आर्थिक बदलावों का सूत्रधार रहा है। कर्तव्यकाल में हम सामूहिक प्रयासों से विकसित भारत की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। इन 75 वर्षों में हमारी संसद के माध्यम से आम जनता के जीवन में सामाजिक आर्थिक परिवर्तन लाए गए हैं जिससे लोकतंत्र में जनता की आस्था मजबूत हुई है। संविधान ने हमारे लोकतंत्र के तीनों स्तंभों, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को आपसी समन्वय के साथ सुचारु रूप से कार्य करने की व्यवस्था दी है। इन 75 वर्षों में इन तीनों अंगों ने श्रेष्ठता से कार्य करते हुए देश के समग्र विकास में अपनी भूमिका निभाई है।

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