पटना:-बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस पार्टी में बड़े बदलाव की संभावना की चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न समाचार सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए व्यापक स्तर पर बदलाव की तैयारी कर रही है। यह बदलाव 7 अप्रैल 2025 तक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी बिहार के दौरे पर पटना पहुंचने वाले हैं।बिहार में कांग्रेस लंबे समय से अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने की कोशिश कर रही है। 1990 के दशक में मंडल राजनीति के उभार और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रभाव के बाद से कांग्रेस का प्रभाव राज्य में कम होता गया है। विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन लगातार कमजोर रहा है, और लोकसभा चुनाव 2024 के बाद भी कई राज्यों में मिली हार ने कांग्रेस को आत्ममंथन के लिए मजबूर किया है। बिहार में इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव को कांग्रेस एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रही है। इसके लिए पार्टी नेतृत्व ने संगठन में बड़े बदलाव का फैसला लिया है, जिसमें प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष से लेकर जिला और प्रखंड स्तर तक के नेताओं को शामिल किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी 7 अप्रैल 2025 को पटना में “संविधान सुरक्षा सम्मेलन” में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह आंदोलन को याद करना और बिहार की जनता की आवाज को समझना बताया जा रहा है। यह दौरा पिछले तीन महीनों में उनका तीसरा बिहार दौरा होगा, जो यह दर्शाता है कि कांग्रेस राज्य में अपनी सक्रियता बढ़ाने के लिए गंभीर है। इस दौरे के बाद पार्टी की स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे, ताकि संगठन को मजबूत करने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके। इस दौरान “हर घर कांग्रेस का झंडा” अभियान की समीक्षा भी होगी, जिसका लक्ष्य बिहार के हर घर तक पार्टी की पहुंच सुनिश्चित करना है।बिहार कांग्रेस में बदलाव की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। हाल ही में पार्टी ने अपने प्रदेश प्रभारी को बदलकर कृष्णा अल्लावरु को जिम्मेदारी सौंपी थी। इसके बाद, दलित चेहरे के रूप में विधायक राजेश राम को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। यह कदम दलित वोटों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो बिहार में करीब 25% मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके अलावा, जिला और प्रखंड स्तर पर निष्क्रिय नेताओं को हटाकर नए और सक्रिय चेहरों को मौका देने की योजना है। स्क्रीनिंग कमेटी का गठन कर संगठन को मजबूत करने के लिए जिलों का दौरा शुरू किया जाएगा। हालांकि, कुछ नेताओं का मानना है कि चुनावी साल में इतने बड़े बदलाव जोखिम भरे हो सकते हैं।