इंपैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार की सात प्रतिष्ठित हस्तियों को इस साल के पद्म सम्मानों से नवाजा गया है, जिसमें प्रख्यात लोक गायिका शारदा सिन्हा और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता आचार्य किशोर कुणाल को मरणोपरांत सम्मानित किया गया। शारदा सिन्हा को पद्म विभूषण और किशोर कुणाल को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, अन्य पाँच हस्तियों में पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को भी मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार प्रदान किए।शारदा सिन्हा, जिन्हें ‘बिहार कोकिला’ के नाम से जाना जाता है, को भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से मरणोपरांत सम्मानित किया गया। उनका निधन 5 नवंबर 2024 को 72 वर्ष की आयु में ब्लड कैंसर (मल्टीपल मायलोमा) से जूझने के बाद हुआ था। शारदा सिन्हा ने अपने पांच दशक लंबे करियर में बिहार की लोक संगीत परंपरा को देश और दुनिया में एक नई पहचान दी। उनके छठ गीत, जैसे ‘कार्तिक मास इजोरिया’ और ‘सूरज भइले बिहान’, आज भी बिहार और उत्तर प्रदेश के घरों में छठ पूजा के दौरान गूंजते हैं।उन्होंने 62 छठ गीत रिकॉर्ड किए, जो नौ एल्बमों में रिलीज हुए, और बॉलीवुड में भी ‘तार बिजली’ (मैंने प्यार किया) और ‘बाबुल’ (हम आपके हैं कौन) जैसे गीतों से अपनी छाप छोड़ी। शारदा सिन्हा को पहले भी पद्म श्री (1991) और पद्म भूषण (2018) से सम्मानित किया जा चुका था। उनके बेटे अंशुमन सिन्हा ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए कहा, यह मेरी माँ के योगदान का सम्मान है। उन्होंने बिहार की संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहुँचाया। यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी और सामाजिक-धार्मिक कार्यकर्ता आचार्य किशोर कुणाल को मरणोपरांत पद्म श्री से सम्मानित किया गया। किशोर कुणाल का निधन भी पिछले साल हुआ था। वे पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव थे और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कई पहल शुरू की थीं। उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए काम किया।उनके परिवार ने इस सम्मान पर कहा, किशोर कुणाल ने हमेशा समाज की भलाई के लिए काम किया। यह सम्मान उनके कार्यों को सच्ची श्रद्धांजलि है।बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी को भी मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। सुशील मोदी का निधन मई 2024 में कैंसर से हुआ था। वे बिहार की राजनीति में एक मजबूत स्तंभ थे और अपने लंबे करियर में राज्य के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनके परिवार ने इस सम्मान को बिहार के लोगों की जीत बताया।बिहार की चार अन्य हस्तियों को भी पद्म सम्मान से नवाजा गया, जिनमें शामिल हैं:
• डॉ. राम बिहारी सिंह (पद्म श्री): चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए। वे पटना के एक प्रसिद्ध चिकित्सक हैं, जिन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए काम किया।
• प्रो. अशोक कुमार झा (पद्म श्री): शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए। वे बिहार विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर रहे और कई साहित्यिक कृतियों के रचयिता हैं।
• सुधा देवी (पद्म श्री): मिथिला पेंटिंग को बढ़ावा देने के लिए। उन्होंने इस पारंपरिक कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
• महेश प्रसाद यादव (पद्म श्री): सामाजिक कार्य के लिए। उन्होंने बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वरोजगार के लिए कई पहल कीं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी सम्मानित हस्तियों को बधाई दी और कहा, यह बिहार के लिए गर्व का क्षण है। इन हस्तियों ने अपने कार्यों से न केवल बिहार का, बल्कि पूरे देश का नाम रौशन किया है।उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान बिहार के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शारदा सिन्हा के बेटे अंशुमन सिन्हा ने माँ की ओर से पद्म विभूषण ग्रहण किया। किशोर कुणाल और सुशील कुमार मोदी के परिवार के सदस्य भी समारोह में मौजूद थे। इस साल कुल 139 पद्म पुरस्कार दिए गए, जिसमें 7 पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण, और 113 पद्म श्री शामिल हैं। ये पुरस्कार कला, सामाजिक कार्य, विज्ञान, चिकित्सा, साहित्य, और खेल जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिए गए।