इंपैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार में इस साल मॉनसून की कमजोर शुरुआत ने राज्य के 20 जिलों को सूखे की चपेट में ला दिया है। जून 2025 में सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई, और मौसम विभाग के अनुसार जुलाई में भी बारिश की कमी बनी रहेगी। यह स्थिति किसानों के लिए गंभीर संकट का कारण बन रही है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी, जिसमें सामान्य से अधिक बारिश का दावा किया गया था, गलत साबित होने पर विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
पटना मौसम केंद्र के अनुसार, बिहार के 38 में से 20 जिले सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से पटना, नालंदा, गया, औरंगाबाद, भोजपुर, रोहतास, कैमूर, बक्सर, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, और कटिहार शामिल हैं। जून में इन जिलों में बारिश की कमी ने धान, मक्का, और अन्य खरीफ फसलों की बुआई को प्रभावित किया है। किसानों का कहना है कि बिना पर्याप्त बारिश के फसलें सूख रही हैं, और सिंचाई के लिए नहरों में भी पानी की कमी है।पटना मौसम केंद्र ने 5 से 10 जुलाई तक बिहार में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन यह सामान्य से कम रहने की आशंका है। केंद्र ने लोगों से वज्रपात और खराब मौसम में सतर्कता बरतने की अपील की है। हालांकि, मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर अब भरोसा कम हो रहा है, क्योंकि जून में सामान्य से अधिक बारिश का दावा गलत साबित हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित मॉनसून पैटर्न इस संकट के लिए जिम्मेदार हैं।
बिहार में खेती मुख्य रूप से मॉनसून पर निर्भर है, और बारिश की कमी ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है।हालांकि 20 जिले सूखे की चपेट में हैं, पश्चिम चंपारण जैसे कुछ क्षेत्रों में गंडक नदी के उफान ने बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। यह विडंबना बिहार की जलवायु चुनौतियों को उजागर करती है, जहां एक ओर बारिश की कमी है, तो दूसरी ओर बाढ़ का खतरा। विशेषज्ञों ने सरकार से दीर्घकालिक जल प्रबंधन नीति की मांग की है।