Thursday 19-Feb-2026

बिहार में अपराध नियंत्रण को लेकर डीजीपी का बड़ा फैसला,1172 अपराधियों की संपत्ति होगी जब्त

बिहार में अपराध नियंत्रण को लेकर डीजीपी का बड़ा फैसला,1172 अपराधियों की संपत्ति होगी जब्त

इम्पैक्ट लाइव टीम पटना : बिहार में बढ़ते अपराध को काबू करने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बिहार पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस महानिदेशक डीजीपी विनय कुमार ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने ऐलान किया कि राज्यभर में 1172 कुख्यात अपराधियों की पहचान की गई है, जिन्होंने अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की है। इन अपराधियों की संपत्ति को नए बीएनएसएस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कानून के तहत जब्त किया जाएगा।

डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि बिहार पुलिस ने राज्य के 1249 थानों से डेटा इकट्ठा कर 1172 ऐसे अपराधियों की सूची तैयार की है, जिन्होंने आपराधिक गतिविधियों जैसे हत्या, डकैती, अपहरण, और साइबर अपराध के जरिए अवैध संपत्ति अर्जित की है। इनमें से 188 अपराधियों के खिलाफ कोर्ट में संपत्ति जब्ती के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। डीजीपी ने कहा कि यह कार्रवाई बिना केंद्रीय एजेंसियों जैसे प्रवर्तन निदेशालय की मदद से की जाएगी, और पुलिस स्वतंत्र रूप से इसे अंजाम देगी।

बिहार पुलिस ने नए बीएनएसएस कानून को अपराध नियंत्रण का प्रमुख हथियार बनाया है। इस कानून के तहत जांच अधिकारियों को अधिक अधिकार दिए गए हैं। अब अगर किसी जांच अधिकारी को लगता है कि किसी अपराधी ने अवैध संपत्ति अर्जित की है, तो वह सीधे कोर्ट को लिखित जानकारी दे सकता है। इस संशोधन से जांच प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, 100 फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना की जाएगी, ताकि अपराधियों को जल्द सजा मिल सके और न्याय प्रक्रिया में तेजी आए।

डीजीपी विनय कुमार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न केवल अपराधियों, बल्कि भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। 2025 में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल है। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि बिहार पुलिस अब सीबीआई और दिल्ली पुलिस की तर्ज पर काम करेगी, ताकि अपराधियों पर तेजी से शिकंजा कसा जा सके।बिहार पुलिस की एक रिसर्च रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले 10 वर्षों में हिंसक अपराधों में वृद्धि का मुख्य कारण फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों की बिक्री है। 2015 से 2024 तक के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि हत्या, अपहरण, डकैती, और बैंक लूट जैसे अपराध अवैध हथियारों की उपलब्धता के कारण बढ़े हैं। इसके लिए विशेष कार्य बल ने सुझाव दिया है कि शस्त्र लाइसेंस धारकों की गोला-बारूद की सीमा को 200 से कम किया जाए, अक्षम लोगों के लाइसेंस रद्द किए जाएं, और नगालैंड व जम्मू-कश्मीर से जारी लाइसेंस की समीक्षा की जाए।

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